रैनसमवेयर समूह World Leaks ने कुदनकुलम परमाणु संयंत्र से जुड़े दस्तावेज़ डार्क वेब पर प्रकाशित किए, परंतु NPCIL ने कहा कि ये फ़ाइलें सुरक्षा‑संबंधी सिस्टम से नहीं जुड़ी हैं और कोई जोखिम नहीं बनती। यह खुलासा जनता में शांति लाने के उद्देश्य से किया गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- लीक में केवल सामान्य बुनियादी सुविधाओं के इंजीनियरिंग ड्रॉइंग शामिल हैं।
- कोई भी दस्तावेज़ परमाणु रिएक्टर कोर या सुरक्षा प्रणाली से संबंधित नहीं है।
- यह घटना डेटा चोरी का परिणाम है, न कि रैनसमवेयर द्वारा सिस्टम को बंद करना।
रैनसमवेयर समूह World Leaks ने हाल ही में डार्क वेब पर कुदनकुलम परमाणु संयंत्र से जुड़ी कई फ़ाइलें प्रकाशित कीं, जिससे देश में अस्थायी चिंता उत्पन्न हुई। कुदनकुलम, तमिलनाडु में स्थित भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र, 6,000 मेगावॉट की कुल क्षमता वाला है। हालांकि, राष्ट्रीय परमाणु शक्ति निगम (NPCIL) ने स्पष्ट किया कि इन फ़ाइलों में कोई भी सुरक्षा‑संबंधी या संचालन‑संबंधी जानकारी नहीं है।
पृष्ठभूमि और प्रारंभिक रिपोर्ट
रायटर्स ने पहले इस बात को उजागर किया था कि समूह ने संयंत्र के कुछ भागों के ब्लूप्रिंट, सप्लायर विवरण, निरीक्षण रिकॉर्ड और उपकरण समीक्षाएँ अपलोड की थीं। लेकिन इन दस्तावेज़ों का स्रोत सत्यापित नहीं किया गया और उनमें रिएक्टर कोर या रूस के रोसाटॉम द्वारा आपूर्ति किए गए मुख्य घटकों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।
NPCIL का आधिकारिक बयान
15 जुलाई 2026 को जारी किए गए एक बयान में, NPCIL ने बताया कि लीक में केवल Units 3 और 4 के “Common Services, Balance of Plant (BoP)” पैकेज से संबंधित इंजीनियरिंग ड्रॉइंग शामिल हैं। यह पैकेज 2018 में रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर को सार्वजनिक टेंडर के माध्यम से सौंपा गया था और इसमें सामान्य थर्मल पावर प्लांट जैसी सुविधाएँ शामिल हैं, न कि विशेष परमाणु संचालन‑सिस्टम। NPCIL ने कहा, “ये जानकारी परमाणु सुरक्षा या सुरक्षा प्रणाली से संबंधित नहीं है।”
डेटा उल्लंघन की तकनीकी व्याख्या
रिलायंस ग्रुप ने स्वीकार किया कि कुछ डेटा एक तृतीय‑पक्ष डेटा सेंटर (Yotta) में स्थित सर्वर से चोरी हो गया था। भारत की कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT‑In) ने इस लीक पर कार्रवाई शुरू की और रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ मिलकर लॉग डेटा एकत्र कर कारण पता करने की कोशिश कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, फ़ाइलें एन्क्रिप्ट नहीं हुई थीं, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह एक साधारण डेटा‑थेफ्ट है, न कि रैनसमवेयर‑आधारित जाम‑प्रहार।
पहले के साइबर‑सुरक्षा मुद्दे
कुदनकुलम पर पहले भी साइबर‑सुरक्षा संबंधी चिंताएँ उठी थीं; 2019 में NPCIL ने बताया था कि एक कंप्यूटर में मैलवेयर का पता चला था, परंतु ऑपरेशनल सिस्टम को कोई नुकसान नहीं पहुँचा। वर्तमान में यूनिट 3 और 4 निर्माणाधीन हैं, जो भारत के परमाणु ऊर्जा विस्तार योजना का हिस्सा हैं।
कुल मिलाकर, NPCIL ने भरोसा दिलाया है कि भारत की परमाणु सुरक्षा मानक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ हैं और इस प्रकार की डेटा लीक से सार्वजनिक सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।