दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली के 26 सरकारी अस्पतालों में महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों के खाली पड़े होने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने GTB अस्पताल में 400 वेंटिलेटर के बेकार होने की स्थिति को 'चौंकाने वाला' बताया है।
मुख्य बातें
- दिल्ली के 26 सरकारी अस्पतालों में भारी मात्रा में चिकित्सा उपकरण बिना उपयोग के पड़े हैं।
- GTB अस्पताल में 400 वेंटिलेटर और 910 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बेकार हैं।
- अदालत ने स्वास्थ्य विभाग के सचिवों को अस्पताल-वार जांच के लिए बैठक करने का निर्देश दिया है।
- उपकरणों के बेकार होने का मुख्य कारण तकनीकी कर्मचारियों की कमी और सहायक उपकरणों का अभाव बताया गया है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार द्वारा प्रस्तुत एक रिपोर्ट पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें दिखाया गया है कि शहर के 26 सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण बिना उपयोग के पड़े हैं। अदालत ने इस स्थिति को स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन में एक बड़ी विफलता के रूप में देखा है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने गुरु तेग बहादुर (GTB) अस्पताल की स्थिति को 'काफी चौंकाने वाला' करार दिया। रिपोर्ट के अनुसार, वहां 400 वेंटिलेटर और 910 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बिना किसी उपयोग के रखे हुए हैं। अदालत ने यह भी नोट किया कि अस्पताल में ईसीजी (ECG) मशीन भी काम नहीं कर रही है, जो एक स्वास्थ्य संस्थान के लिए अत्यंत आवश्यक उपकरण है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल संसाधनों की बर्बादी का नहीं है, बल्कि जीवन और मृत्यु के बीच के अंतर का है। जब करोड़ों रुपये के उपकरण केवल तकनीकी कर्मचारियों की कमी या छोटे पुर्जों के अभाव में बेकार पड़े हों, तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे की गंभीर खामियों को दर्शाता है। विशेष रूप से दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में महंगे उपकरणों का अनुपयोगी होना कैंसर रोगियों के इलाज में बड़ी बाधा है।
महंगे चिकित्सा उपकरणों का इस तरह बेकार पड़ा होना सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ है।
अदालत ने निर्देश दिया है कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के सचिव, अस्पताल के निदेशकों के साथ बैठक करें ताकि इस मुद्दे का अस्पताल-वार समाधान निकाला जा सके। अधिकारियों को तकनीकी जनशक्ति प्रदान करने, अनुपयोगी उपकरणों को हटाने और आवश्यक पुर्जों की खरीद करने का निर्देश दिया गया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अस्पताल में मौजूद अधिकांश उपकरण कोविड-19 महामारी के दौरान दान किए गए थे। महामारी के बाद, जब मांग कम हुई, तो ये उपकरण अतिरिक्त हो गए और उचित रखरखाव या तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण अब बेकार पड़े हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. उपकरण बेकार क्यों पड़े हैं?
मुख्य रूप से तकनीकी रूप से योग्य कर्मचारियों की कमी और आवश्यक एक्सेसरीज या पुर्जों के न होने के कारण।
2. कोर्ट ने क्या आदेश दिया है?
कोर्ट ने सचिवों को बैठक करने और उपकरणों के पुनर्वितरण, तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति और मरम्मत के लिए तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।