डेटिंग ऐप 'Goose' जो दोस्ती पर ध्यान केंद्रित करने का दावा करता है, अब फर्जी प्रोफाइल, भेदभावपूर्ण नीतियों और समावेशिता की कमी के आरोपों से घिर गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- Goose ऐप खुद को 'एंटी-हुकअप' और दोस्ती बढ़ाने वाले प्लेटफॉर्म के रूप में पेश कर रहा है।
- उपयोगकर्ताओं ने ऐप पर फर्जी प्रोफाइल (Catfishing) और सख्त लेकिन असंगत सत्यापन नियमों की शिकायत की है।
- LGBTQIA+ समुदाय के सदस्यों ने ऐप में नस्लीय विविधता की कमी और 'मास्कुलिन' (Masculine) पुरुषों के प्रति झुकाव का आरोप लगाया है।
न्यूयॉर्क स्थित नया सोशल और डेटिंग ऐप Goose, जो खुद को पारंपरिक डेटिंग ऐप्स के विकल्प के रूप में पेश करता है, अब विवादों के केंद्र में है। जहाँ एक ओर यह ऐप 'एंटी-एल्गोरिदम' और केवल हुकअप के बजाय वास्तविक दोस्ती पर ध्यान केंद्रित करने का दावा करता है, वहीं इसके वास्तविक उपयोगकर्ताओं के अनुभव इसके बिल्कुल विपरीत कहानी बयां कर रहे हैं।
विवादास्पद सत्यापन और भेदभाव के आरोप
WIRED की एक विस्तृत जांच में सामने आया है कि Goose का सत्यापन (Verification) प्रक्रिया काफी असंगत है। कई उपयोगकर्ताओं ने शिकायत की है कि उनके प्रोफाइल को बिना किसी ठोस कारण के 'अनुचित' मानकर खारिज कर दिया गया। उदाहरण के लिए, एक उपयोगकर्ता का अकाउंट केवल इसलिए फ्लैग कर दिया गया क्योंकि उनकी तस्वीरों में उनके शरीर की बनावट दिखाई दे रही थी, जबकि ऐप का उद्देश्य सामाजिक जुड़ाव बढ़ाना था।
इसके अलावा, LGBTQIA+ समुदाय के भीतर से भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उपयोगकर्ताओं का कहना है कि ऐप का इंटरफेस और नियम अनजाने में केवल 'मास्कुलिन' (Masculine) पुरुषों को ही बढ़ावा दे रहे हैं। ऐप में बायो (Bio) में 'प्रोनॉन्स' (Pronouns) जोड़ने की सुविधा की कमी और मेकअप वाले प्रोफाइल के रिजेक्शन ने समावेशिता (Inclusivity) पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
नस्लीय विविधता और सुरक्षा की कमी
एक और गंभीर मुद्दा नस्लीय विविधता (Racial Diversity) का है। न्यूयॉर्क के ब्रोंक्स जैसे विविध क्षेत्रों के उपयोगकर्ताओं ने पाया कि ऐप के मैप पर अश्वेत (Black) और लैटिनक्स (Latinx) समुदाय के लोगों की उपस्थिति नगण्य है, जबकि प्रोफाइल में सफेद पुरुषों की संख्या अधिक है। कुछ उपयोगकर्ताओं ने तो यहाँ तक कहा कि उन्हें ऐप पर केवल AI-जनरेटेड या जेनेरिक दिखने वाले प्रोफाइल ही मिल रहे हैं।
सुरक्षा के मोर्चे पर भी Goose विफल साबित हो रहा है। 'इनवाइट-ओनली' (Invite-only) होने के बावजूद, ऐप पर कैटफिशिंग (Catfishing) यानी फर्जी प्रोफाइल का खतरा बना हुआ है। एक उपयोगकर्ता ने खुलासा किया कि उसकी निजी तस्वीरें किसी दूसरे नाम से प्रोफाइल पर इस्तेमाल की जा रही थीं, जो ऐप की कमजोर पहचान प्रणाली को दर्शाता है।
निष्कर्ष
हालाँकि Goose के सह-संस्थापक डेरेक चैडविक का कहना है कि कंपनी पहचान या लिंग के आधार पर कोई निर्णय नहीं लेती है, लेकिन उपयोगकर्ताओं का बढ़ता असंतोष यह संकेत देता है कि केवल 'दोस्ती' का मार्केटिंग टैग लगाना पर्याप्त नहीं है। यदि ऐप को वास्तव में एक सुरक्षित और समावेशी स्थान बनना है, तो उसे अपनी नीतियों और एल्गोरिदम में बड़े सुधार करने होंगे।