ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के मुख्य आयुक्त एम. महेश्वर राव ने व्हाइट-टॉपिंग कार्यों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पारंपरिक जूट के बोरों के बजाय जियोटेक्सटाइल शीट के उपयोग का निर्देश दिया है। उन्होंने निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए सीसीटीवी और सख्त गुणवत्ता मानकों पर जोर दिया है।

मुख्य बिंदु

  • व्हाइट-टॉपिंग के लिए पारंपरिक बोरों के बजाय जियोटेक्सटाइल शीट या क्योरिंग ब्लैंकेट का पायलट परीक्षण।
  • सड़कों की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों की स्थापना का निर्देश।
  • अतिक्रमण हटाने और भूमिगत केबल प्रबंधन के लिए सख्त कार्रवाई।
  • पुलों के लिए नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग (NDT) का आदेश।

ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के मुख्य आयुक्त एम. महेश्वर राव ने बेंगलुरु में चल रहे व्हाइट-टॉपिंग (सफेद टॉपिंग) कार्यों की गुणवत्ता में क्रांतिकारी सुधार लाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। निरीक्षण के दौरान, उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पारंपरिक जूट के बोरों के स्थान पर जियोटेक्सटाइल शीट या क्योरिंग ब्लैंकेट का उपयोग करके 100 मीटर के एक हिस्से पर पायलट प्रोजेक्ट चलाएं। इसका उद्देश्य कंक्रीट की मजबूती और स्थायित्व का आकलन करना है।

निरीक्षण के दौरान राव ने स्पष्ट किया कि निर्माण की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने अमृतहल्ली मेन रोड, जक्कूर रेलवे ओवरब्रिज और सहकारनगर जैसे विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि फुटपाथ का काम सड़क निर्माण के साथ-साथ तुरंत शुरू किया जाए ताकि नागरिकों को असुविधा न हो।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बेंगलुरु जैसे महानगर में सड़कों की खराब स्थिति का मुख्य कारण कंक्रीट की उचित क्योरिंग (तराई) न होना है। पारंपरिक जूट के बोरे जल्दी सूख जाते हैं, जिससे कंक्रीट में दरारें आ सकती हैं। जियोटेक्सटाइल तकनीक नमी को लंबे समय तक बनाए रखती है, जिससे सड़क का जीवनकाल काफी बढ़ सकता है।

गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचा केवल निर्माण के बारे में नहीं है, बल्कि सही तकनीक के उपयोग के बारे में है।

इसके अलावा, राव ने सुरक्षा और शहरी प्रबंधन पर भी ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने सड़क चौड़ीकरण के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबलों को 15 दिनों के भीतर भूमिगत करने और सड़क के किनारे अवैध अतिक्रमणों को हटाने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने जक्कूर रेलवे ओवरब्रिज के संरचनात्मक स्वास्थ्य की जांच के लिए नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग (NDT) का भी आदेश दिया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

बेंगलुरु में 'व्हाइट-टॉपिंग' परियोजनाएं डामर (Asphalt) की सड़कों को कंक्रीट की सड़कों में बदलने के लिए शुरू की गई हैं ताकि भारी यातायात के कारण होने वाले गड्ढों की समस्या को कम किया जा सके। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में निर्माण के दौरान उचित रखरखाव की कमी के कारण इन सड़कों की उम्र कम रही है।

क्या आप जानते हैं?: जियोटेक्सटाइल शीट कंक्रीट को नमी प्रदान करने के लिए पानी के वाष्पीकरण को नियंत्रित करती है, जिससे कंक्रीट अधिक घना और मजबूत बनता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: व्हाइट-टॉपिंग क्या है?
उत्तर: यह मौजूदा डामर की सड़कों के ऊपर कंक्रीट की एक परत बिछाने की प्रक्रिया है ताकि सड़क अधिक टिकाऊ बन सके।

प्रश्न 2: जियोटेक्सटाइल शीट का क्या लाभ है?
उत्तर: यह पारंपरिक बोरों की तुलना में नमी को बेहतर तरीके से रोकती है, जिससे कंक्रीट की मजबूती बढ़ती है।