मैसूरु दशहरा के दौरान प्रस्तावित कंबला आयोजन के लिए पेड़ों की कटाई और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के आरोपों के खिलाफ संयुक्त कार्य समिति ने मोर्चा खोल दिया है। समिति ने सरकार पर झूठे वादे करने और पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट करने का आरोप लगाया है।
मुख्य बातें
- कंबला आयोजन की तैयारियों के नाम पर सतगल्ली में पेड़ों की अवैध कटाई का आरोप।
- संयुक्त कार्य समिति ने सरकार के 'पर्यावरण अनुकूल' दावों को नकारा।
- 36 पेड़ों की कटाई पर एफआईआर दर्ज, 33 अन्य पेड़ों पर खतरा।
- समिति ने कंबला आयोजन को रद्द करने की मांग की है।
मैसूरु: कर्नाटक राज्य रैत संघ, दलित संघर्ष समिति और 'पारीसरकी नावू' जैसे प्रगतिशील संगठनों के गठबंधन, जिसे संयुक्त कार्य समिति के रूप में जाना जाता है, ने मैसूरु दशहरा के दौरान प्रस्तावित कंबला कार्यक्रम के लिए पेड़ों की कटाई और पर्यावरण के विनाश की कड़ी निंदा की है।
समिति ने एक प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया है कि सरकार ने बार-बार दावा किया था कि कंबला कार्यक्रम के लिए किसी भी पेड़ को नहीं काटा जाएगा और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। हालांकि, जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। समिति के अनुसार, सतगल्ली में चल रही तैयारियों के कारण न केवल पेड़ों को काटा जा रहा है, बल्कि वहां के झील पारिस्थितिकी तंत्र को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।
पर्यावरण बनाम आयोजन: क्या हुआ है?
समिति ने खुलासा किया कि 26 जून को सतगल्ली के सर्वे नंबर 85, 88, 106 और 107 में अवैध रूप से 36 पेड़ काटे गए थे, जिसके बाद वन विभाग ने 27 जून को प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी। चिंताजनक बात यह है कि अब उसी क्षेत्र में 33 अन्य पेड़ों को काटने के लिए चिह्नित किया गया है।
यह भूमि मैसूरु विकास प्राधिकरण (MDA) के स्वामित्व में है और इसे पार्क एवं खुले स्थान के रूप में आरक्षित किया गया था। लगभग चार साल पहले, पर्यावरणविदों के विरोध के बाद यहां स्टेडियम बनाने का प्रस्ताव छोड़ दिया गया था। लेकिन अब, इस भूमि को खेल विभाग को साइकिल वेलोड्रोम के लिए हस्तांतरित करने की प्रक्रिया के बीच पेड़ों की कटाई शुरू हो गई है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल पेड़ों की कटाई का नहीं है, बल्कि विकास और विरासत के बीच बढ़ते संघर्ष का प्रतीक है। जब सरकारी वादे और जमीनी क्रियान्वयन में इतना बड़ा अंतर हो, तो यह सार्वजनिक विश्वास को कम करता है और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अपूरणीय क्षति का कारण बनता है।
"प्रशासन द्वारा पर्यावरण की रक्षा के वादे और कंबला की तैयारियों के बीच का विरोधाभास गंभीर प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।"
पारीसरकी नावू के पारशुराम गौड़ा ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने न केवल पेड़ काटे, बल्कि झाड़ियों, घास और पक्षियों के प्राकृतिक आवास को भी नष्ट कर दिया है। समिति ने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और वन विभाग को आगे किसी भी कटाई की अनुमति नहीं देनी चाहिए।
Frequently Asked Questions
1. संयुक्त कार्य समिति की मुख्य मांग क्या है?
समिति ने सरकार से कंबला आयोजन के प्रस्ताव को तुरंत रद्द करने और पेड़ों की अवैध कटाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
2. विवादित भूमि का मूल उद्देश्य क्या था?
यह भूमि मैसूरु विकास प्राधिकरण (MDA) के तहत एक पार्क और खुले स्थान के रूप में आरक्षित थी।