आंध्र प्रदेश की गृह मंत्री वी. अनीता और जनजातीय कल्याण मंत्री गुम्माडी संध्या रानी ने पाडेरू के सुदूर इलाकों का दौरा किया। सरकार का लक्ष्य जनजातीय क्षेत्रों में गांजा की खेती को पूरी तरह समाप्त करना है।
मुख्य बातें
- गृह मंत्री वी. अनीता ने पाडेरू के सुदूर गांव सप्पीपुट्टू का दौरा किया।
- 'एगल' (EAGLE) समूह के माध्यम से नशीली दवाओं के खिलाफ 'पल्ले बतलाओ' कार्यक्रम आयोजित किया गया।
- किसानों को गांजा की जगह एवोकैडो और मक्का जैसी वैकल्पिक फसलों के बीज दिए गए।
- सरकार का लक्ष्य जनजातीय क्षेत्रों में 'जीरो गांजा खेती' का लक्ष्य हासिल करना है।
आंध्र प्रदेश सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों में नशीली दवाओं के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंगलवार को, गृह मंत्री वी. अनीता और जनजातीय कल्याण मंत्री गुम्माडी संध्या रानी ने एएसआर जिले के पाडेरू मंडल के सुदूर गांव सप्पीपुट्टू का दौरा किया। यह दौरा 'एगल' (Elite Anti-Narcotics Group for Law Enforcement) के विशेष 'पल्ले बतलाओ' आउटरीच कार्यक्रम का हिस्सा था।
इस दौरान मंत्रियों का जनजातीय समुदाय द्वारा पारंपरिक स्वागत किया गया और उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों के साथ 'धिम्सा' नृत्य में भी भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य न केवल नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाना था, बल्कि उन किसानों को वैकल्पिक आजीविका प्रदान करना भी था जो वर्तमान में अवैध गांजा खेती पर निर्भर हैं। मंत्रियों ने ग्रामीणों को एवोकैडो, शरीफा और मक्का जैसे उन्नत बीजों और पौधों का वितरण किया।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जनजातीय क्षेत्रों में नशीली दवाओं का व्यापार न केवल सामाजिक ताने-बाने को नष्ट कर रहा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी अवैध गतिविधियों की ओर धकेल रहा है। सरकार द्वारा वैकल्पिक फसलों का प्रोत्साहन सीधे तौर पर किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और अवैध खेती के चक्र को तोड़ने की एक रणनीतिक कोशिश है।
सरकार का ध्यान केवल कानून प्रवर्तन पर नहीं, बल्कि किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर अपराध की जड़ को मिटाने पर है।
गृह मंत्री वी. अनीता ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यह पहली बार है जब 'पल्ले बतलाओ' कार्यक्रम को इतने दुर्गम जनजातीय क्षेत्र में आयोजित किया गया है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि कई परिवार अब गांजा की खेती छोड़कर सरकारी सहायता से वैकल्पिक कृषि अपना रहे हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
आंध्र प्रदेश के जनजातीय बेल्ट में गांजा की खेती एक पुरानी समस्या रही है। भौगोलिक दुर्गमता के कारण इन क्षेत्रों में कानून प्रवर्तन कठिन रहा है। हालांकि, हाल के वर्षों में सरकार ने 'नशा मुक्त समाज' के निर्माण के लिए कृषि-आधारित पुनर्वसन मॉडल पर जोर दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: 'एगल' (EAGLE) समूह क्या है?
उत्तर: यह कानून प्रवर्तन के लिए एलीट एंटी-नारकोटिक्स ग्रुप है जो नशीली दवाओं के खिलाफ अभियान चलाता है।
प्रश्न 2: सरकार किसानों को कौन सी फसलें अपनाने के लिए कह रही है?
उत्तर: सरकार एवोकैडो, शरीफा और मक्का जैसी लाभदायक वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा दे रही है।