टोक्यो का यासुकुनी श्राइन जापान के लिए श्रद्धा का केंद्र है, लेकिन युद्ध अपराधियों के शामिल होने के कारण यह एशिया में विवाद का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है।
मुख्य बातें
- यासुकुनी श्राइन में 25 लाख से अधिक युद्ध मृतकों की आत्माओं को समाहित किया गया है।
- इसमें 14 'क्लास ए' युद्ध अपराधियों को भी शामिल किया गया है, जो विवाद की जड़ है।
- चीन और दक्षिण कोरिया जापान के नेताओं द्वारा यहाँ जाने को ऐतिहासिक अत्याचारों के प्रति माफी न मांगने के रूप में देखते हैं।
टोक्यो स्थित यासुकुनी श्राइन (Yasukuni Shrine) जापान के सबसे पवित्र और साथ ही सबसे विवादास्पद स्थलों में से एक है। जहाँ एक ओर लाखों जापानी नागरिक और सैनिक यहाँ अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने आते हैं, वहीं दूसरी ओर यह स्थल एशिया के अन्य देशों के लिए जापान के औपनिवेशिक काल के अत्याचारों का प्रतीक बन चुका है।
श्राइन की स्थापना 1869 में सम्राट मेजी के शासनकाल के दौरान की गई थी। इसका उद्देश्य उन योद्धाओं की आत्माओं को सम्मानित करना था जो देश के लिए युद्ध में शहीद हुए थे। वर्तमान में, यहाँ लगभग 25 लाख लोग समाहित हैं, जिनमें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चीन, सोवियत संघ और अन्य एशियाई देशों के खिलाफ लड़ने वाले जापानी सैनिक शामिल हैं।
क्यों है यह इतना विवादित?
विवाद की असली जड़ 1978 में शुरू हुई, जब युद्ध के बाद अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण द्वारा दोषी ठहराए गए 14 'क्लास ए' युद्ध अपराधियों को यहाँ शामिल किया गया। इन अपराधियों को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार पाया गया था।
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जब भी जापानी रक्षा मंत्री या प्रधानमंत्री इस श्राइन का दौरा करते हैं, तो चीन और दक्षिण कोरिया जैसे पड़ोसी देशों से तीव्र प्रतिक्रिया आती है। चीन इसे जापान की आक्रामकता का प्रतीक मानता है, जबकि दक्षिण कोरिया का कहना है कि जापान को अपने अतीत के प्रति 'सच्चा पश्चाताप' दिखाना चाहिए।
यासुकुनी श्राइन केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि जापान की भू-राजनीतिक पहचान और उसके युद्धकालीन इतिहास के बीच का एक संवेदनशील संघर्ष है।
हाल ही में, जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने सीधे तौर पर श्राइन में प्रवेश नहीं किया, लेकिन पास से ही श्रद्धांजलि अर्पित की। इस कदम की चीन ने कड़ी निंदा की है, जबकि जापानी अधिकारियों का तर्क है कि वे केवल युद्ध में मारे गए निर्दोष लोगों को सम्मान देने के लिए व्यक्तिगत क्षमता में जाते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जापानी सेना ने 1931 में मंचूरिया पर आक्रमण किया और 1937-1945 के बीच चीन के साथ भीषण युद्ध लड़ा। इतिहासकारों का अनुमान है कि इस दौरान 1.5 से 2 करोड़ चीनी नागरिक मारे गए थे। इन घटनाओं की यादें आज भी पूर्वी एशिया के राजनीतिक संबंधों में तनाव पैदा करती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. यासुकुनी श्राइन में कौन समाहित है?
इसमें द्वितीय विश्व युद्ध सहित जापान के विभिन्न युद्धों में मारे गए लगभग 25 लाख सैनिक और नागरिक शामिल हैं।
2. चीन और दक्षिण कोरिया इस पर आपत्ति क्यों जताते हैं?
क्योंकि इस श्राइन में उन युद्ध अपराधियों को भी स्थान दिया गया है जिन्होंने युद्ध के दौरान एशिया में भीषण अत्याचार किए थे।