भारी बारिश और भूस्खलन के कारण पझाсси बांध में गाद (silt) का स्तर बढ़ गया है, जिससे कन्नूर शहर और आसपास के इलाकों में पेयजल उपचार और आपूर्ति प्रभावित हुई है।

मुख्य बातें

  • भारी बारिश और भूस्खलन के कारण पझाсси बांध में टर्बिडिटी (गंदलापन) का स्तर अत्यधिक बढ़ गया है।
  • कन्नूर शहर और आसपास के क्षेत्रों में प्रतिदिन 30 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति बाधित हुई है।
  • टर्बिडिटी का स्तर 125 NTU तक पहुँच गया है, जबकि सुरक्षित उपचार के लिए यह 50 NTU से कम होना चाहिए।
  • केरल जल प्राधिकरण (KWA) स्थिति पर चौबीसों घंटे नज़र रख रहा है।

केरल के कन्नूर जिले में भारी बारिश और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हुए भूस्खलन के कारण पझाсси बांध में भारी मात्रा में गाद (silt) जमा हो गई है। इस अत्यधिक गंदलेपन के कारण पझाсси जल उपचार संयंत्र (Pazhassi treatment plant) में पेयजल उपचार प्रक्रिया बाधित हो गई है, जिससे कन्नूर शहर और आसपास के क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति काफी कम हो गई है।

केरल जल प्राधिकरण (KWA) के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह पानी का प्रदूषण नहीं है, बल्कि कच्चे पानी में मिट्टी की मात्रा बढ़ने के कारण टर्बिडिटी (गंदलापन) का स्तर असामान्य रूप से बढ़ गया है। शनिवार रात किए गए परीक्षणों में टर्बिडिटी का स्तर लगभग 125 NTU पाया गया, जबकि संयंत्र की कार्यक्षमता के लिए यह स्तर 50 NTU से कम होना अनिवार्य है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि जल उपचार संयंत्रों की क्षमता सीधे तौर पर कच्चे पानी की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। जब टर्बिडिटी का स्तर बहुत अधिक होता है, तो फिल्टर बहुत जल्दी बंद हो जाते हैं, जिससे पूरी उपचार प्रक्रिया ठप हो सकती है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे जलवायु परिवर्तन और पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाले भूस्खलन शहरी बुनियादी ढांचे को सीधे प्रभावित कर रहे हैं।

जब टर्बिडिटी बहुत अधिक होती है, तो उपचार क्षमता तेजी से गिर जाती है और फिल्टर जल्दी चोक हो जाते हैं।

पझाсси उपचार संयंत्र कन्नूर शहर, वलपट्टनम और चिरकल जैसे क्षेत्रों को प्रतिदिन लगभग 30 मिलियन लीटर (MLD) पानी की आपूर्ति करता है। अधिकारियों के अनुसार, यह मटमैला पानी कर्नाटक के जंगली ऊपरी इलाकों में हुई भारी बारिश और भूस्खलन का परिणाम है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पझाсси बांध क्षेत्र के जल प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों में, वर्षा के पैटर्न में बदलाव और वनों की कटाई के कारण ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में मिट्टी का कटाव एक गंभीर समस्या बनकर उभरा है, जो बांधों की भंडारण क्षमता और पानी की गुणवत्ता दोनों को प्रभावित करता है।

क्या आप जानते हैं?: NTU (Nephelometric Turbidity Units) का उपयोग पानी की स्पष्टता मापने के लिए किया जाता है; जितना अधिक NTU होगा, पानी उतना ही मटमैला होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या पानी पीने के लिए असुरक्षित है?
उत्तर: अधिकारियों के अनुसार, यह प्रदूषण नहीं बल्कि मिट्टी का मिश्रण है। उपचार प्रक्रिया को सुरक्षित स्तर तक पहुँचने का इंतज़ार किया जा रहा है।

प्रश्न 2: आपूर्ति कब तक सामान्य होगी?
उत्तर: जैसे ही बारिश कम होगी और टर्बिडिटी का स्तर 50 NTU से नीचे आएगा, पंपिंग फिर से शुरू कर दी जाएगी।