विशाखापत्तनम के ऐतिहासिक INS डीगा नागरिक एन्क्लेव में वाणिज्यिक उड़ानों का दौर समाप्त हो गया है। अब सभी निर्धारित उड़ानें और VTZ कोड नए भोगपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्थानांतरित हो गए हैं।
मुख्य बातें
- विशाखापत्तनम के INS डीगा से अंतिम इंडिगो उड़ान रविवार रात को रवाना हुई।
- सोमवार से सभी अनुसूचित वाणिज्यिक उड़ानें भोगपुरम (अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा) से संचालित होंगी।
- IATA कोड 'VTZ' अब आधिकारिक तौर पर भोगपुरम को हस्तांतरित कर दिया गया है।
- INS डीगा का उपयोग केवल नौसेना, आपातकालीन स्थितियों और वीआईपी उड़ानों के लिए किया जाएगा।
विशाखापत्तनम के विमानन इतिहास में एक युग का अंत हो गया है। रविवार, 16 अगस्त 2026 को, INS डीगा के नागरिक एन्क्लेव से अंतिम निर्धारित वाणिज्यिक सेवा, इंडिगो की दिल्ली के लिए 10:45 पीएम की उड़ान (6E 2018), सफलतापूर्वक रवाना हुई। इसके साथ ही, तीन दशकों से शहर की सेवा कर रहे इस एयरफील्ड का नागरिक परिचालन आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है।
सोमवार, 17 अगस्त 2026 को मध्यरात्रि 12:01 बजे से, अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (भोगपुरम) पूरी तरह से चालू हो गया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचनाओं के अनुसार, अब सभी अनुसूचित एयरलाइन उड़ानें भोगपुरम से संचालित होंगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विशाखापत्तनम का प्रसिद्ध हवाई अड्डा कोड 'VTZ' भी अब भोगपुरम के साथ स्थानांतरित हो गया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह बदलाव आंध्र प्रदेश के बुनियादी ढांचे के लिए एक मील का पत्थर है। पिछले 30 वर्षों से, नागरिक उड़ानें नौसेना के अधिकार क्षेत्र में सीमित स्लॉट के भीतर संचालित होती थीं। भोगपुरम में एक 'ग्रीनफील्ड' हवाई अड्डे के आने से विमानन क्षमता में भारी वृद्धि होगी, जिससे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और बड़े विमानों के संचालन में कोई बाधा नहीं आएगी।
विशाखापत्तनम का स्थानांतरण केवल एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना नहीं है, बल्कि यह आंध्र प्रदेश के वैश्विक आर्थिक जुड़ाव के नए द्वार खोलने जैसा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
विशाखापत्तनम का यह हवाई क्षेत्र द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1941 में रॉयल एयर फोर्स द्वारा स्थापित किया गया था। 1942 में यहाँ भारतीय वायु सेना की पहली टुकड़ी तैनात की गई थी। 1986 में यह क्षेत्र नौसेना के पास चला गया और 1991 में इसे INS डीगा के रूप में कमीशन किया गया। दशकों तक, इसने नागरिक और सैन्य दोनों भूमिकाओं को बखूबी निभाया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या INS डीगा से अब कोई उड़ान नहीं भरेगी?
हाँ, निर्धारित वाणिज्यिक उड़ानें अब बंद हैं, लेकिन गैर-अनुसूचित उड़ानें और नौसेना का परिचालन जारी रहेगा।
2. नया हवाई अड्डा कहाँ स्थित है?
सभी नई उड़ानें भोगपुरम स्थित अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से संचालित होंगी।