CBI की चार्जशीट में महाराष्ट्र के एक भौतिक विज्ञान विशेषज्ञ के बयान ने NTA की चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञ का दावा है कि विषय विशेषज्ञों के चयन के लिए कोई औपचारिक मानदंड नहीं थे और यह सब केवल सिफारिशों पर आधारित था।

मुख्य बातें

  • CBI की चार्जशीट में 360 गवाहों के नाम शामिल हैं।
  • विषय विशेषज्ञों के चयन के लिए कोई लिखित पात्रता मानदंड नहीं पाए गए।
  • विशेषज्ञों का चयन मुख्य रूप से NTA से जुड़े लोगों की सिफारिशों पर आधारित था।
  • पेपर अनुवाद और मॉडरेशन प्रक्रिया में निगरानी की भारी कमी पाई गई।

NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महाराष्ट्र के एक भौतिक विज्ञान (Physics) विशेषज्ञ के बयान ने इस जांच को एक नया मोड़ दे दिया है, जिसमें उन्होंने विशेषज्ञों के चयन की प्रक्रिया में व्याप्त खामियों का पर्दाफाश किया है।

विशेषज्ञ के अनुसार, NEET के लिए प्रश्न पत्र तैयार करने, अनुवाद करने और मॉडरेशन करने वाले विषय विशेषज्ञों के चयन के लिए कोई औपचारिक या लिखित मानदंड निर्धारित नहीं थे। इसके बजाय, यह प्रक्रिया पूरी तरह से उन व्यक्तियों की सिफारिशों पर निर्भर थी जो पहले से ही NTA के साथ जुड़े हुए थे। यह खुलासा बताता है कि कैसे एक अनौपचारिक नेटवर्क के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिकाओं में लोगों को नियुक्त किया जा रहा था।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यदि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था के पास विशेषज्ञों के चयन के लिए कोई पारदर्शी प्रक्रिया नहीं है, तो पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकना लगभग असंभव हो जाता है। विशेषज्ञों की नियुक्ति में पारदर्शिता की कमी सीधे तौर पर परीक्षा की अखंडता को खतरे में डालती है।

विशेषज्ञों के चयन में पारदर्शिता की कमी और निगरानी का अभाव ही पेपर लीक जैसी बड़ी साजिशों के लिए रास्ता साफ करता है।

जांच में यह भी सामने आया है कि प्रश्न पत्रों के अनुवाद की प्रक्रिया में भी बड़ी लापरवाही बरती गई। पुणे की एक शिक्षिका, मनीषा संजय हलवरकर, जो पहले से ही इस मामले में गिरफ्तार हैं, ने भौतिक विज्ञान के प्रश्न पत्रों का अनुवाद किया था। विशेषज्ञ का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में न तो कोई औपचारिक नियुक्ति पत्र जारी किए जाते थे और न ही कोई लिखित दस्तावेजीकरण किया जाता था।

इसके अलावा, रसायन विज्ञान (Chemistry) विशेषज्ञों के मामले में भी मिलीभगत के आरोप लगे हैं। विशेषज्ञ ने बताया कि एक विशेष विशेषज्ञ द्वारा अपने मित्रों और परिचितों को NTA के पैनल में शामिल करने के लिए भारी प्रभाव डाला गया, जिससे सिस्टम की सुरक्षा और अधिक कमजोर हो गई।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. CBI की चार्जशीट में क्या मुख्य खुलासा हुआ है?
CBI ने खुलासा किया है कि NTA के पास विषय विशेषज्ञों को चुनने के लिए कोई औपचारिक मानदंड नहीं थे और चयन काफी हद तक आपसी सिफारिशों पर आधारित था।

2. पेपर लीक में विशेषज्ञों की क्या भूमिका है?
पेपर तैयार करने, अनुवाद करने और मॉडरेशन करने वाले विशेषज्ञों के पास संवेदनशील जानकारी होती है, और पर्याप्त निगरानी न होने पर वे जानकारी लीक कर सकते हैं।

क्या आप जानते हैं?: NEET परीक्षा भारत की सबसे कठिन और बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में से एक है, जिसमें लाखों छात्र भाग लेते हैं।