भारत की आगामी 2027 की जनगणना में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जहाँ नागरिकों से उनके मोबाइल नंबर, आधार और बैंक खातों जैसी निजी जानकारी मांगी जा सकती है।

मुख्य बातें

  • 2027 की जनगणना में डिजिटल पहचान संबंधी डेटा शामिल होने की संभावना है।
  • मोबाइल, आधार और बैंक विवरण जैसे महत्वपूर्ण डेटा एकत्र किए जा सकते हैं।
  • पिछले 150 वर्षों की जनगणना प्रवृत्तियों से यह एक बड़ा बदलाव है।

भारत सरकार की आगामी 2027 की जनगणना के ढांचे में एक क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी चल रही है। सूत्रों के अनुसार, इस बार के प्रश्नावली में केवल जनसंख्या के आंकड़ों तक ही सीमित न रहकर, नागरिकों के डिजिटल फुटप्रिंट्स को भी शामिल किया जा सकता है। इसमें मोबाइल नंबर, आधार कार्ड विवरण और बैंक खातों की जानकारी एकत्र करने का प्रस्ताव है।

ऐतिहासिक बदलाव: 1872 से अब तक

यदि हम जनगणना विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध पिछले आंकड़ों का विश्लेषण करें, तो 1872 से लेकर 2011 तक की जनगणना के प्रश्नपत्रों में कभी भी नागरिकों के व्यक्तिगत वित्तीय या डिजिटल पहचान दस्तावेजों के बारे में नहीं पूछा गया। यह प्रस्तावित बदलाव भारत के डेटा संग्रह के इतिहास में सबसे बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस कदम का उद्देश्य सरकारी योजनाओं के वितरण को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना है। आधार और बैंक विवरणों के एकीकरण से 'लीकेज' को रोका जा सकेगा और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा। हालांकि, यह डेटा गोपनीयता (Data Privacy) को लेकर नई बहस भी छेड़ सकता है।

डिजिटल इंडिया के युग में, जनगणना का डेटा केवल जनसंख्या का आंकड़ा नहीं, बल्कि देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था का आधार बनेगा।

प्रश्नावली के संबंध में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उत्तरदाताओं को अपनी "सर्वोत्तम जानकारी या विश्वास" के आधार पर सवालों के जवाब देने होंगे। यह सुनिश्चित करेगा कि डेटा संग्रह में सटीकता बनी रहे।

क्या आप जानते हैं?: भारत में पहली बार जनगणना की प्रक्रिया वर्ष 1872 में शुरू की गई थी, जो अब एक पूर्ण डिजिटल स्वरूप लेने की ओर अग्रसर है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या यह जानकारी देना अनिवार्य होगा?
जनगणना के नियमों के तहत, उत्तरदाताओं को अपनी जानकारी के अनुसार सटीक उत्तर देना आवश्यक होता है।

2. क्या मेरा डेटा सुरक्षित रहेगा?
सरकार का दावा है कि डेटा सुरक्षा के कड़े प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा, हालांकि गोपनीयता विशेषज्ञों की नजर इस पर टिकी है।