मध्य प्रदेश के पांढुर्णा में 350 फीट ऊँचे मोबाइल टावर पर तीन दिन से बैठा रहकर अंततः बचाया गया नशे में युवक, एक व्यापक पुलिस‑SDRF बचाव मिशन का नतीजा था। ऑपरेशन में नीचे जाल, गद्दे और निरंतर बातचीत के साथ 51 घंटे की कड़ी मेहनत की गई।

मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले में 350 फीट ऊँचे मोबाइल टावर पर चढ़ कर तीन दिनों तक बैठा रहना, देश के इतिहास में सबसे लंबा 'टावर ड्रामा' बन गया। इस असामान्य स्थिति को समाप्त करने के लिए स्थानीय पुलिस, राज्य आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (SDRF) और कई अन्य एजेंसियों ने एक विस्तृत बचाव योजना तैयार की, जो अंततः सफल रही।

घटनाक्रम की रूपरेखा

सोमवार शाम लगभग 4 बजे, एक अज्ञात युवक हाथ में शराब लेकर टावर की सीढ़ी चढ़ना शुरू करता है। नीचे मौजूद नागरिकों ने उसे रोकने की कई बार कोशिश की, लेकिन नशे में धुत युवक ने आवाज़ों को अनसुना कर टावर के सबसे ऊँचे, संकरी हिस्से पर पहुँच कर बैठ गया। तुरंत पांढुर्णा थाना पुलिस को सूचना दी गई।

प्राथमिक प्रतिक्रिया और सुरक्षा उपाय

पांढुर्णा थाना प्रभारी अमित दाणी ने बताया कि युवक अत्यधिक शराब के प्रभाव में था और वह किसी भी निर्देश का पालन नहीं कर रहा था। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, पुलिस ने टावर के नीचे चारों ओर गद्दे बिछाए और एक मजबूत जाल (नेट) स्थापित किया, ताकि युवक गिरने पर चोट न लगे। स्थानीय प्रयासों के बावजूद स्थिति स्थिर नहीं हुई, इसलिए SDRF को आपातकालीन रेस्क्यू के लिए बुलाया गया।

SDRF‑पुलिस का 51‑घंटे का संयुक्त ऑपरेशन

SDRF टीम ने टावर की ऊँचाई, रात के अंधेरे और उच्च वोल्टेज के जोखिम को देखते हुए विशेष उपकरण और तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग किया। टीम ने लगातार बातचीत के माध्यम से युवक को शांत रखने की कोशिश की, जबकि नीचे के जाल को नियमित रूप से जांचा गया। 51 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद, शाम 7 बजे टीम ने युवक को सुरक्षित रूप से नीचे उतार लिया।

परिणाम और आगे की कार्रवाई

युवक को नीचे उतारते ही हजारों दर्शकों और प्रशासनिक कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। पुलिस अभी भी युवक के होश आने और उसकी पहचान तथा टावर पर चढ़ने के पीछे के कारणों का पता लगाने की प्रतीक्षा में है। इस घटना ने आपातकालीन प्रतिक्रियाकुशलता, जन जागरूकता और हाई‑वोल्टेज संरचनाओं की सुरक्षा के महत्व को फिर से उजागर किया है।