दिल्ली पुलिस ने जाली सरकारी पहचान पत्र बनाने और बेचने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। विदेशी साव और संतोष कुमार नामक इन आरोपियों ने फर्जीवाड़ा करने के लिए एक विशेष वेबसाइट बना रखी थी।

साइबर अपराध और पहचान की चोरी (आइडेंटिटी थेफ्ट) के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए, दिल्ली पुलिस ने नकली सरकारी पहचान पत्र (आईडी) बनाने और बेचने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान विदेशी साव और संतोष कुमार के रूप में हुई है। ये आरोपी देश के विभिन्न राज्यों में फैले इस अवैध नेटवर्क को संचालित कर रहे थे।

गिरोह के काम करने का अनोखा तरीका

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। आरोपियों ने एक फर्जी वेबसाइट बना रखी थी, जिसके जरिए वे ग्राहकों को आकर्षित करते थे। कानून प्रवर्तन एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए, आरोपियों ने एक विशेष व्यवस्था की थी जिसके तहत ग्राहकों को ऑर्डर देने से पहले वेबसाइट पर मौजूद एक डिजिटल वॉलेट को रिचार्ज करना पड़ता था। इस वॉलेट-आधारित भुगतान प्रणाली के माध्यम से आरोपी अवैध रूप से कमाए गए धन को छुपाते थे। भुगतान सफल होने के बाद, वे उच्च गुणवत्ता वाले नकली आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और ड्राइविंग लाइसेंस तैयार कर ग्राहकों को भेजते थे।

राष्ट्रीय सुरक्षा और वित्तीय प्रणालियों के लिए गंभीर खतरा

फर्जी सरकारी दस्तावेजों का इस तरह खुलेआम बनना और बिकना राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ देश की वित्तीय प्रणालियों के लिए भी एक अत्यंत गंभीर खतरा है। अपराधी अक्सर इन जाली दस्तावेजों का उपयोग बैंक खाते खोलने, फर्जी सिम कार्ड खरीदने और विभिन्न प्रकार के साइबर घोटालों को अंजाम देने के लिए करते हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के गिरोहों का ऑनलाइन सक्रिय रहना डिजिटल सत्यापन प्रक्रियाओं में मौजूद खामियों को उजागर करता है, जिन्हें तुरंत दुरुस्त करने की आवश्यकता है।

जांच और आगे की कार्रवाई

विदेशी साव और संतोष कुमार की गिरफ्तारी से इस गिरोह से जुड़े खरीदारों और उप-एजेंटों के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। दिल्ली पुलिस वर्तमान में उक्त फर्जी वेबसाइट के डिजिटल फुटप्रिंट्स, सर्वर लॉग और बैंक खातों की गहन जांच कर रही है। जांचकर्ताओं को अंदेशा है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों से भी जुड़े हो सकते हैं। इस अवैध नेटवर्क को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए पुलिस द्वारा कई स्थानों पर छापेमारी की जा रही है।