भारतीय नौसेना के ड्रिश्टी‑10 नामक अनमैन्ड एरियल वाहन ने गुजरात के पोर्बंदर के निकट प्रशिक्षण उड़ान के दौरान जमीन पर टकरा कर गिरावट दर्ज की। सभी पायलट और कर्मी सुरक्षित रहे, जबकि कारण पता लगाने के लिए जांच शुरू की गई है।
गुजरात के पोर्बंदर के पास स्थित धर्मपुर गाँव में भारतीय नौसेना का ड्रिश्टी‑10 अनमैन्ड एरियल वाहन (UAV) प्रशिक्षण सफ़र के दौरान अचानक जमीन पर गिरा। यह घटना दोपहर के समय हुई, जब विमान ने एक स्थानीय एयर एंक्लेव से उड़ान भरी थी। नौसेना ने बताया कि दुर्घटना में कोई जान‑जाँच या चोटें नहीं हुईं, सभी कर्मी सुरक्षित हैं।
ड्रिश्टी‑10 की तकनीकी विशेषताएँ
ड्रिश्टी‑10 का कुल वजन लगभग 1,100 किलोग्राम है, जिसमें 450 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने की क्षमता है। 15 मीटर की पंखों की चौड़ाई और 8.3 मीटर की लंबाई इसे लंबी दूरी के इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) मिशनों के लिये उपयुक्त बनाती है। इस UAV में उन्नत सेंसर पैकेज, एएलटी (ऑल‑वेदर लैंडिंग टैक्टिक) और हाई‑एंड कम्युनिकेशन सिस्टम लगे हैं, जिससे यह भारत की समुद्री और सीमा सुरक्षा में एक प्रमुख भूमिका निभाता है।
पिछले दुर्घटना की यादें
ड्रिश्टी‑10 का पहला गंभीर दुर्घटना जनवरी 2025 में हुआ था, जब वही UAV पोर्बंदर के समुद्र तट पर प्री‑एक्सेप्टेंस ट्रायल के दौरान गिर गया था। उस दुर्घटना से भी कोई जनहानि नहीं हुई, परंतु इससे नौसेना को उसकी विश्वसनीयता एवं रख‑रखाव मानकों की पुनः समीक्षा करनी पड़ी। वर्तमान दुर्घटना को देखते हुए, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह दोहराव संभवतः समान तकनीकी या संचालन संबंधी त्रुटियों की ओर इशारा कर रहा है।
जांच और संभावित कारण
नौसेना ने तुरंत एक विशेष जांच टीम गठित कर दुर्घटना के मूल कारणों की जाँच शुरू कर दी है। प्रारम्भिक रिपोर्ट में बताया गया है कि संभावित कारणों में एयरोडायनामिक त्रुटि, सेंसर फेलियर, या ग्राउंड कंट्रोल लिंक में व्यवधान शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि इस तरह की समस्याएँ दोहराई जाती हैं, तो नौसेना को UAV के सॉफ्टवेयर अपडेट, रख‑रखाव प्रोटोकॉल और पायलट प्रशिक्षण में अतिरिक्त सुधार करने की आवश्यकता होगी।
रक्षा क्षेत्र में प्रभाव
ड्रिश्टी‑10 जैसे उच्च‑स्तरीय UAV का संचालन भारतीय रक्षा रणनीति में एक प्रमुख स्तम्भ बन चुका है। ऐसे प्लेटफ़ॉर्म समुद्री सतह निगरानी, सीमा नियंत्रण, तथा संभावित विरोधी क्षमताओं की पहचान में अभिन्न भूमिका निभाते हैं। इसलिए, किसी भी प्रकार की विफलता को शीघ्रता से समझना और सुधारात्मक कदम उठाना राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत आवश्यक है। इस घटना को देखते हुए, रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि भविष्य में UAV के परीक्षण एवं परिचालन मानकों को कड़ा किया जाएगा।