तीरुची‑करैक्कुड़ी के 90 किमी लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग पर बढ़ते ट्रैफ़िक के कारण चालक वर्ग ने चार लेन में विस्तार की तुरंत मांग की है। 16 साल पहले दो‑लेन बनाये गए इस मार्ग पर अब प्रतिदिन 10,000 से अधिक पीसीयू का दबाव है।
तीरुची‑करैक्कुड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 210) के 90 किमी के खंड पर पिछले 16 वर्षों में यातायात की मात्रा में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। मूल रूप से दो‑लेन के रूप में निर्मित यह मार्ग, रेमसवारम, रामनाथपुरम, परामाकुड़ी, करैक्कुड़ी, देवकोट्टी और शिवगंगा सहित कई महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ता है।
इतिहास और प्रारम्भिक योजना
16 साल पहले इस खंड को दो‑तरफ़ा सड़क और पक्के शोल्डर के साथ उन्नत किया गया था, जबकि चार‑लेन बनाने की योजना तब के ट्रैफ़िक आंकड़ों के कारण टाल दी गई थी। उस समय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने निर्धारित किया था कि किसी भी दो‑लेन मार्ग को चार‑लेन में बदलने के लिये दैनिक 10,000 PCU (पैसेंजर कार यूनिट) से अधिक ट्रैफ़िक होना चाहिए।
वर्तमान ट्रैफ़िक दबाव
हालिया NHAI अध्ययन ने पुष्टि की है कि NH 210 पर दैनिक ट्रैफ़िक अब 10,000 PCU से आगे बढ़ चुका है। हजारों वाहन, विशेषकर ब्लू मेटल और एम‑सैंड ले जाने वाले ट्रक, पूरे दिन इस मार्ग पर धावते हैं, जिससे गति घटती है और दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ती है। चालक वर्ग ने बताया कि तीरुची‑पुडुकोट्टाई के बीच 50‑70 km/h की गति बनाए रखना मुश्किल हो गया है।
राजनीतिक हस्तक्षेप और परियोजना की स्थिति
तीरुची सांसद दुरै वैको ने इस मुद्दे को केंद्र सरकार के राजमार्ग मंत्रालय के समक्ष उठाया है। NHAI ने चार‑लेन विस्तार के लिये विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली है और प्रारम्भिक अनुमोदन भी दिया गया है, परन्तु कार्यान्वयन में देरी के कारण स्थानीय चालक वर्ग ने त्वरित कार्रवाई की माँग की है।
आर्थिक एवं सामाजिक महत्व
इस राजमार्ग का विस्तार न केवल परिवहन लागत को घटाएगा, बल्कि तीरुची, पुडुकोट्टाई तथा पड़ोसी जिलों की औद्योगिक और कृषि वस्तुओं के बाजार पहुंच को भी सुगम बनाएगा। बेहतर सड़क बुनियादी ढांचा पर्यटन, विशेषकर रेमसवारम जैसे पवित्र स्थल की यात्रा को सुविधाजनक करेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में वृद्धि की संभावनाएँ बढ़ेंगी।
भविष्य की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि चार‑लेन विस्तार के साथ साथ उचित रख‑रखाव, ट्रैफ़िक नियंत्रण प्रणाली और पर्यावरणीय मूल्यांकन को भी समान गति से आगे बढ़ाना आवश्यक है। यदि समय पर कार्य किया गया तो यह परियोजना दक्षिण तमिलनाडु के विकास में एक मील का पत्थर बन सकती है।