केरल के वायनाड में दो दिन से चल रहे बचाव कार्यों में तीन और शव बरामद हुए, जिनमें हिमाचल के अभियंता राहुल शर्मा और बिहार के खुदाई ऑपरेटर मोहम्मद इमरान की पहचान हुई। अब केवल दो पीड़ित अभी भी लापता हैं, जबकि सात घायल कामगार अस्पताल में इलाज जारी हैं।
केरल के वायनाड जिले में अनाक्कम्पॉयिल‑कल्लाड़ी‑मेप्पड़ी दोहरी टनल परियोजना के निर्माण स्थल पर 7 जुलाई को हुई धधकती बारिश के कारण जमीन के नीचे क्षय हुआ, जिससे बड़े पैमाने पर मलबा गिरा और कई श्रमिक फँस गए। इस आपदा के बाद राज्य सरकार, केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (KSDMA) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) ने तीव्र खोज‑बचाव अभियान शुरू किया।
बचाव कार्य का अंतिम चरण
तीन दिन के कठिन संघर्ष के बाद, 9 जुलाई की शाम को बचाव दल ने तीन और शव बरामद किए, जिससे मंगलवार को घोषित छह मृतकों की संख्या अब छह ही रह गई। अभी तक केवल दो श्रमिक लापता माने जा रहे हैं; फायर‑एंड‑रेस्क्यू सर्विसेज ने मीणाक्षी नदी के किनारे अतिरिक्त खोज को तीव्र करने का वादा किया है।
पहचान और शव परिक्रिया
बारम्बार बरामद किए गए तीन शवों में से दो की पहचान हुई: हिमाचल प्रदेश के इंजीनियर राहुल शर्मा और बिहार के खुदाई ऑपरेटर मोहम्मद इमरान। उनके शवों की पोस्ट‑मॉर्टेम जांच वायथिरी तालुका अस्पताल में की गई और बाद में कोझिकोड सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एम्बाल्मिंग के लिए ले जाया गया, जहाँ से उन्हें उनके परिवारों को वापस भेजा जाएगा।
घायल और स्थानीय प्रतिक्रिया
सात घायल श्रमिक अभी भी विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से कई आईसीयू में निगरानी के तहत हैं। कृषि मंत्री टी. सिद्दीक़ ने स्थानीय निवासियों को आश्वस्त किया कि निकासी के बाद भी स्थानीय परिवहन और कनेक्टिविटी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। जिला कलेक्टर को विशेष भोजन रेशन और निरंतर चिकित्सा सहायता के लिए सूची तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
राजनीतिक एवं पर्यावरणीय पहलू
सार्वजनिक कार्य मंत्री पी.के. बशीर ने कहा कि लगातार बारिश ने मलबा हटाने में बाधा उत्पन्न की, और बड़े पैमाने पर हटाने से द्वितीयक भू-स्लिप का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी उजागर किया कि टनल निर्माण कंपनी को 1 जुलाई तक खुदाई की मिट्टी हटाने का निर्देश दिया गया था, पर कंपनी ने इसे अनदेखा किया। इस पर राज्य कैबिनेट ने दो स्वतंत्र उच्च‑स्तरीय जांचों को आदेशित किया है, ताकि सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय उल्लंघनों की जांच की जा सके।
केंद्रीय समर्थन और भविष्य की योजना
बशीर ने केंद्र सरकार से बायराकुप्पा पुल के निर्माण के लिए संभावित वित्तीय सहायता की पुष्टि की और कहा कि इस नवंबर में फाउंडेशन पथर रखी जाएगी। साथ ही, पूझिथोड़े‑पादिनजाराथरा वैकल्पिक मार्ग के सर्वेक्षण को तेज करने के लिए एक संयुक्त विभागीय बैठक आयोजित की जाएगी।