केलो इंडिया बैडमिंटन गोल्ड मेडलिस्ट अनन्या फडके को एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर बनते हुए राष्ट्रपति गोल्ड मेडल मिला। एएफएमसी के 60वें बैच में 141 मेडिकल स्नातकों को विभिन्न सेवाओं में कमीशन किया गया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • अनन्या फडके ने एएफएमसी में सर्वश्रेष्ठ मेडिकल कडेट का राष्ट्रपति गोल्ड मेडल जीता
  • उन्होंने बैडमिंटन में केलो इंडिया गोल्ड मेडल जीतकर आईएएफ में शामिल होने का सपना पूरा किया
  • त्रि-सेवा पासिंग‑आउट परेड में 141 मेडिकल स्नातकों को विभिन्न शाखाओं में कमीशन किया गया

अनन्या फडके, जिसके पास केलो इंडिया बैडमिंटन में गोल्ड मेडल है, को भारतीय वायु सेना में फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में कमीशन किया गया और उन्हें राष्ट्रपति गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। यह सम्मान एएफएमसी (Armed Forces Medical College) के 60वें बैच कमीशनिंग समारोह में दिया गया, जहाँ डिरेक्टर जनरल एएफएमएस सर्जन वाइस एडमिरल अर्ति सारिन ने उपस्थिति दर्ज की।

सेवा में प्रवेश का सपना

फडके ने बताया कि बचपन से स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के समारोहों को देखना उनका प्रेरणास्रोत रहा, जिससे उन्होंने हमेशा भारतीय सेना, नौसेना या वायु सेना में सेवा करने का सपना देखा। अब यह सपना साकार हो गया है, और वह गर्व से नीले यूनिफॉर्म में सेवा करने को तैयार हैं।

शैक्षणिक और खेल दोन्ही में उत्कृष्टता

अभिनव स्कूल और फर्ग्यूसन कॉलेज की पूर्व छात्रा फडके ने पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भी चमक दिखाई। 2019 में उन्होंने केलो इंडिया यूथ गेम्स में अंडर‑17 डबल्स में गोल्ड मेडल जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। बैडमिंटन के अलावा वह ट्रेकिंग और वॉलीबॉल का भी शौक रखती हैं, जो उनके बहु‑आयामी व्यक्तित्व को दर्शाता है।

त्रि‑सेवा पासिंग‑आउट परेड की विशिष्टता

एएफएमसी की कमीशनिंग परेड भारतीय सशस्त्र बलों में एकमात्र त्रि‑सेवा पासिंग‑आउट परेड है, जहाँ सेना, नौसेना और वायु सेना के अधिकारी एक ही मंच पर स्नातक होते हैं। इस वर्ष 112 स्नातकों को भारतीय सेना, 12 को भारतीय नौसेना और 17 को भारतीय वायु सेना में कमीशन किया गया। इस अनूठे स्वरूप ने समारोह को और भी खास बना दिया।

परिवार और भावनात्मक क्षण

फडके के माता‑पिता, दोनों दंत चिकित्सक, ने कहा कि उनकी बेटी ने शैक्षणिक और खेल दोनों क्षेत्रों में संतुलन बनाकर हमेशा नई चुनौतियों को स्वीकार किया। इसी समारोह में कोलोनल जगमोहन गोएल ने अपनी बेटी, सर्जन सब‑लिटरेटेंस रेश्मा गोएल, को भारतीय नौसेना में कमीशन होते देखा, जिससे भावनात्मक क्षण और भी गहरा हो गया।