केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के सही उच्चारण और प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है। नए दिशानिर्देशों के तहत राजकीय गीतों को राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान से पहले बजाना अनिवार्य कर दिया गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- राज्यों को राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत की सही स्क्रिप्ट और उच्चारण का कड़ाई से पालन करना होगा।
- गृह मंत्रालय ने प्रोटोकॉल तय किया है: पहले राज्य गीत, फिर राष्ट्रगीत और अंत में राष्ट्रगान बजाया जाएगा।
- राष्ट्रगीत (वंदे मातरम) को सभी छह अंतराओं के साथ पूर्ण रूप से बजाया जाना अनिवार्य है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। इसमें राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' और राष्ट्रगान 'जन गण मन' को गाते या बजाते समय "सही स्क्रिप्ट और सटीक उच्चारण" का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा बनाए रखने के लिए उनका सही और शुद्ध उच्चारण अत्यंत आवश्यक है।
प्रोटोकॉल और गायन का क्रम तय
राज्य के मुख्य सचिवों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों को भेजे गए पत्र में गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जब भी किसी आधिकारिक कार्यक्रम में राज्य गीत गाया जाएगा, तो उसे राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के बीच में नहीं बजाया जा सकता। नए प्रोटोकॉल के अनुसार, सबसे पहले राज्य का आधिकारिक गीत बजाया जाएगा, उसके बाद राष्ट्रगीत और अंत में राष्ट्रगान का गायन या वादन होगा। यह अनुक्रम राष्ट्रीय प्रतीकों के सर्वोच्च सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित किया गया है।
त्रुटिहीन उच्चारण और आधिकारिक पोर्टल की मदद
राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के पाठ और उच्चारण में होने वाली त्रुटियों को रोकने के लिए, मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इनकी सही स्क्रिप्ट और उच्चारण का विवरण गृह मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध है। इसके अलावा, मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि राष्ट्रगीत को उसके सभी छह अंतराओं (stanzas) के साथ पूर्ण रूप से बजाया जाना चाहिए, ताकि इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अखंडता अक्षुण्ण रहे।
संघीय ढांचे में राष्ट्रीय प्रतीकों का महत्व
भारत के संघीय ढांचे में, कई राज्यों के अपने आधिकारिक राज्य गीत हैं (जैसे तमिलनाडु का 'तमिल थाई वाल्थु' या गुजरात का 'जय जय गरवी गुजरात'), जो राज्य स्तरीय कार्यक्रमों में नियमित रूप से गाए जाते हैं। केंद्र सरकार के इस नए कदम का उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को सर्वोपरि रखना और राज्यों के बीच एक समान प्रोटोकॉल स्थापित करना है, जिससे किसी भी प्रकार के असमंजस या प्रोटोकॉल उल्लंघन की स्थिति से बचा जा सके।
कड़ाई से अनुपालन के निर्देश
गृह मंत्रालय ने राज्यों से अनुरोध किया है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाले सभी सरकारी संस्थानों, शैक्षणिक संगठनों और संबंधित निकायों को इस संबंध में तत्काल और उचित निर्देश जारी करें। केंद्र ने साफ किया है कि राष्ट्रीय गरिमा से जुड़े इस विषय पर किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी संबंधित पक्षों को इसका शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।