भरत तिवारी के भाई चंदन ने दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस को बचाने के आरोप लगाए और निष्पक्ष जांच व दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की। परिवार बिहार से न्याय की आशा लेकर आया है, जबकि अब तक किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • चंदन तिवारी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाया
  • पुलिस अधिकारियों को बचाने के आरोप लगाए
  • निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ तेज़ कार्रवाई की मांग

नई दिल्ली – 11 जुलाई 2026 को भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी ने राजधानी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर अपने भाई के एनकाउंटर मामले में न्याय की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका परिवार बिहार से इस उम्मीद के साथ आया है कि केस की पूरी, पक्षपात‑रहित जांच होगी और दोषियों के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पृष्ठभूमि एवं वर्तमान स्थिति

भरत तिवारी, एक युवा किसान, को 22 दिन पहले पुलिस द्वारा एन्काउंटर के रूप में मार दिया गया था। इस घटना ने बिहार में बड़े पैमाने पर विरोध को जन्म दिया और कई सामाजिक संगठनों ने न्याय की माँग की। अब तक मामले में किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है, और जांच को लेकर कई सवाल उठे हैं। चंदन तिवारी ने कहा कि “जाँच में कोई प्रगति नहीं हुई है, जबकि परिवार ने कई महीनों तक धीरज दिखाया है।”

पुलिस बचाने के गंभीर आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चंदन ने आरोप लगाया कि “पुलिस अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है” और यह कि “यदि जांच निष्पक्ष नहीं होगी तो सच्चाई कभी सामने नहीं आएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि कुछ उच्चस्तरीय राजनैतिक हस्तियों ने मामले में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया है, जिससे न्याय में देरी हो रही है। इन आरोपों पर अभी तक किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

परिवार की मांगें और आगे का रास्ता

चंदन तिवारी ने राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियों से अपील की कि वे इस मामले में तेज़ी से हस्तक्षेप करें, सभी संबंधित पुलिस अधिकारियों को बरी नहीं कर सकें और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी कहा कि “हम सिर्फ न्याय चाहते हैं, कोई विशेष राजनीतिक एजेंडा नहीं।” परिवार ने कहा कि यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे कानूनी कदम उठाने से नहीं कतराएंगे।

विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण

भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच, इस तरह के एन्काउंटर केस अक्सर पुलिस पर भरोसा घटाते हैं और सामाजिक असंतोष बढ़ाते हैं। यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह न केवल एक परिवार को, बल्कि पूरे राज्य के न्यायिक तंत्र की विश्वसनीयता को धूमिल कर सकता है। इसलिए, इस केस को शीघ्रता से सुलझाना न केवल कानूनी दायित्व है, बल्कि सामाजिक स्थिरता के लिए भी आवश्यक है।