हिमाचल के उना जिले के दुलेहर गांव में 22 वर्षीय बहन को आरी से मारने की घटना सामने आई। बहन ने अपने भाई के माँ के खिलाफ मौखिक अत्याचार को रोकने की कोशिश की, जिससे भाई ने आरी लेकर परिवार के तीन सदस्यों पर हमला किया। पुलिस ने अपराधी के खिलाफ गंभीर धाराएँ दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • भाई ने आरी से बहन, दादी और चाचा पर हमला किया
  • घटना उना, हिमाचल प्रदेश के दुलेहर गांव में हुई
  • पुलिस ने 126(2), 115(2) और 352 धारा के तहत मामला दर्ज किया

हिमाचल प्रदेश के उना जिले के दुलेहर गाँव में शुक्रवार सुबह एक घरेलू झगड़े के दौरान 22 वर्षीया बहन को आरी से गंभीर रूप से चोट पहुंची। यह घटना तब घटी जब बहन ने अपने भाई को माँ के खिलाफ मौखिक दुर्व्यवहार बंद करने को कहा, लेकिन भाई ने प्रतिक्रिया में आरी उठाकर बहन, उसकी दादी और चाचा पर हमला किया।

घटना की विस्तृत विवरण

पड़ोसियों के अनुसार, सुबह लगभग 7 बजे बहन ने अपने घर में दाँत ब्रश कर रही थी, तभी भाई ने किसी बात पर माँ को verbally abuse करना शुरू किया। बहन ने हस्तक्षेप करके भाई को रोकने की कोशिश की, परंतु भाई ने अभद्र शब्दों में जवाब दिया और तुरंत पास की आरी लेकर बहन के कान के पास वार किया। बहन को सिर के पास गंभीर चोट लगी, जिसे तुरंत दुलेहर के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर ले जाया गया। डॉक्टरों ने एक्स‑रे और हेड स्कैन की सलाह दी।

परिवार के अन्य सदस्य भी घायल

भाई के आक्रमण के बाद, दादी ने चिल्लाहट सुनकर मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप करने की कोशिश की, लेकिन वह भी भाई के हमले का शिकार हुई। उसी दौरान चाचा को भी चोट लगी। घायल परिवार के सदस्यों को पड़ोसियों की मदद से अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

कानूनी कार्रवाई और जांच

उना पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज किया और आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 126(2) (स्वैच्छिक चोट), 115(2) (अन्यायपूर्ण प्रतिबंध), तथा 352 (शांति भंग) के तहत FIR दर्ज की। एक MLC रिपोर्ट तैयार की गई है और जांच जारी है। पुलिस ने कहा कि पीड़ित के बयान रिकॉर्ड कर लिए गये हैं और आगे की चिकित्सा रिपोर्टें केस की दिशा तय करेंगी।

समाज में घरेलू हिंसा पर व्यापक प्रभाव

हिमाचल प्रदेश में घरेलू हिंसा की घटनाओं में हाल के वर्षों में वृद्धि देखी गई है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक तानाशाही और पारिवारिक संरचना के कारण। इस प्रकार की घटनाएँ न केवल पीड़ितों के शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि मानसिक एवं सामाजिक रीढ़ को भी कमजोर करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कड़ी कानूनी प्रवर्तन और जागरूकता अभियानों की आवश्यकता है, जिससे परिवार के भीतर हिंसा को रोकना संभव हो सके।

अधिक जानकारी के लिए स्थानीय पुलिस स्टेशन और स्वास्थ्य विभाग से संपर्क किया जा सकता है।