रंगा रेड्डी के 35 वर्षीय किसान ने शाबद और अपने गाँव में छह लोगों की बेरहमी से हत्या की, जिसमें 16 साल की पीओसीएसओ केस की लड़की, उसके परिवार और अपने ही पत्नी‑बच्चे शामिल हैं। पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- किसान ने पीओसीएसओ शिकायत के बाद 6 लोगों की हत्या की
- पीड़ितों में 16‑साल की लड़की, उसकी माँ‑दादी और स्वयं की पत्नी‑बच्चे शामिल
- अभियुक्त जमानत पर था, अब फरार, पुलिस ने मानहंट जारी किया
रंगा रेड्डी जिले के 35 वर्षीय किसान ने शुक्रवार रात को शाबद शहर और अपने मूल गाँव में एक श्रृंखला हत्याएँ अंजाम दी, जिससे कुल छह शहादतें हुईं। यह हत्याकांड तब शुरू हुआ जब आरोपी ने मई में दर्ज किए गये पीओसीएसओ (बाल यौन शोषण) केस के तहत 16‑साल की लड़की को मार डाला, साथ ही उसके 42‑साल की माँ और 60‑साल की दादी को भी अपनी चाकू से मार गिराया।
पीओसीएसओ केस और जमानत की पृष्ठभूमि
पीओसीएसओ (Protection of Children from Sexual Offences) अधिनियम 2012 के तहत बाल शोषण के मामलों में सख्त सज़ा निर्धारित है। इस मामले में पीड़ित लड़की ने प्रतिवादी के खिलाफ उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करवाई थी, जिससे एक आधिकारिक पीओसीएसओ केस बना। फिर भी, जून में स्थानीय न्यायालय ने प्रतिवादी को प्रत्याशा जमानत (anticipatory bail) प्रदान की, जिससे वह व्यक्तिगत बांड पर रिहा हो गया। न्यायालय ने यह निर्णय इसलिए दिया क्योंकि आरोपित अपराध की अधिकतम सज़ा सात वर्ष से कम थी, जबकि भारतीय दंड संहिता के तहत कड़ी सज़ा संभव है।
हत्या का क्रम और पुलिस की कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, प्रतिवादी ने शाम 10:45 बजे अपने गाँव से लगभग छह किलोमीटर दूर शाबद की ओर रुख किया। उसने लड़की के घर पहुंचकर, जब उसकी माँ ने दरवाज़ा खोला, तो उसे चाकू से मार डाला। आगे वह घर में प्रवेश कर, सोती दादी को मार गिराया और फिर लड़की को जबरन अपने वाहन में ले गया। लड़की की 20‑साल की मानसिक रूप से कमजोर बहन को बचा कर छोड़ दिया गया, जो पुलिस के अनुसार एक चौंकाने वाला तथ्य है।
उसके बाद प्रतिवादी ने गाँव के एक जलाशय (बुंड) तक ड्राइव किया, जहाँ उसने लड़की को चाकू से चुभाकर मार दिया और उसका शव जलाशय के किनारे छोड़ दिया। फिर वह अपने घर वापस आया, जहाँ उसने रात 11:21 बजे अपनी 31‑साल की पत्नी और दो छोटे बच्चों (चार साल और 18 महीने) को सोते हुए एक ही बार में गला घोंट कर मार डाला। हत्या के बाद उसने तुरंत अपने पिता को फोन करके घटना की सूचना दी और फिर अपने गाँव से भाग गया।
समाज और न्याय प्रणाली पर प्रभाव
यह हत्याकांड न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी को उजागर करता है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में मौजूदा खामियों पर भी सवाल खड़ा करता है। पीओसीएसओ मामलों में अक्सर पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है, जबकि अभियोक्ताओं को आसानी से जमानत मिल जाती है, जिससे संभावित हिंसक प्रतिक्रिया की संभावना बढ़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जमानत के नियमों का पुनरावलोकन आवश्यक है, विशेषकर जब आरोपी ने पहले ही गंभीर यौन अपराध किया हो।
पुलिस की भविष्य की योजना
हैदराबाद पुलिस ने अब इस फरारी को पकड़ने के लिए व्यापक मानहंट जारी किया है। भविष्य शहर के आयुक्त तरुण जोशी ने कहा, "अभियुक्त अभी भी फरार है, और हमें नहीं पता कि किस कारण से उसने इतना हिंसक कदम उठाया।" पुलिस ने स्थानीय नेटवर्क, सोशल मीडिया और ड्रोन निगरानी का उपयोग करके आरोपी को खोजने की कोशिश कर रहे हैं।
इस हत्याकांड ने प्रदेश में सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर गहरी चिंताएं उत्पन्न कर दी हैं, और यह मामला न्यायपालिका के निर्णयों की पुनः समीक्षा की मांग को भी उजागर करता है।