पंजाब की महिला मदद डेस्कों ने 1 जनवरी 2023 से 30 जून 2026 के बीच 2,31,677 शिकायतें दर्ज कीं, जिसमें 99,692 केस विशेष महिला मित्रों द्वारा संभाले गए। यह पहल महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • पंजाब के सभी 424 थानों में महिला मदद डेस्क स्थापित
  • 2,31,677 शिकायतों में से 99,692 (74.8%) महिला मित्रों द्वारा निपटाए गए
  • महिला पुलिसकर्मियों के लिए 93 इलेक्ट्रिक स्कूटर प्रदान किए गए

पंजाब पुलिस ने राज्य के 424 पुलिस थानों, जिसमें 39 विशेष प्रयोजन वाले थाने शामिल हैं, में महिला मदद डेस्क स्थापित किए हैं। इन डेस्कों का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को पुलिस तक आसान पहुँच प्रदान करना और पीड़ित‑केंद्रित वातावरण बनाना है। डेस्कों की शुरुआत के बाद से कुल 2,31,677 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें 1,33,152 शिकायतें पंजाब ग्रिवेंस डिस्पोज़ल (PGD) पोर्टल पर आईं।

डेस्कों की कार्यक्षमता और आंकड़े

इन शिकायतों में से 99,692 (लगभग 74.8%) को पंजाब पुलिस महिला मित्र (PPMM) द्वारा सौंपा और निपटाया गया। महिला मित्रों की संख्या 848 तक बढ़ा दी गई है, जिससे सभी 424 थानों में एक समर्पित महिला अधिकारी मौजूद है। इस पहल ने न केवल शिकायतों के समाधान में तेज़ी लाई है, बल्कि महिलाओं का पुलिस प्रति विश्वास भी बढ़ाया है।

सुविधाओं में नवाचार: इलेक्ट्रिक स्कूटर

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने महिला पुलिस कर्मियों के लिए 93 इलेक्ट्रिक स्कूटर मंजूर किए हैं, जिन्हें डीजीपी गौरव यादव ने हाल ही में झंडा गाड़ा। ये स्कूटर महिला मित्रों को तेज़ी से शिकायत स्थल तक पहुँचने और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया देने में मदद करेंगे। यह कदम लैंगिक संवेदनशील पुलिसिंग को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया है।

भविष्य की दिशा और मूल्यांकन

पंजाब पुलिस ने महिला मदद डेस्कों के प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए गैर‑सरकारी संगठनों J‑PAL और Hartek Foundation के साथ मिलकर एक व्यापक आकलन शुरू किया है। विशेष निदेशक जनरल (समुदाय और महिला मामलों) गुरप्रीत देव ने कहा कि ये डेस्क पुलिस और जनता के बीच का अंतर कम कर रहे हैं, तथा पीड़ितों को भरोसा दिला रहे हैं कि उन्हें प्रशिक्षित और सहानुभूतिपूर्ण महिला अधिकारी मिलेंगे।

समग्र प्रभाव

महिला मदद डेस्कों की स्थापन से पंजाब में लैंगिक‑आधारित अपराधों की रिपोर्टिंग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह पहल न केवल पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि सामाजिक स्तर पर लैंगिक समानता की दिशा में भी सकारात्मक परिवर्तन लाती है। भविष्य में इस मॉडल को अन्य राज्यों में दोहराने की संभावना अधिक है।