कोलकाता उच्च न्यायालय ने ट्रेन में दो यात्रियों की हत्या के मामले में दो आरोपी को बरी कर दिया, जबकि टिकेट परीक्षकों (TTE) के भ्रष्ट आचरण को ‘सब्ज़ी की तरह बेचना’ कह कर कड़ी निंदा की। अदालत ने रेलवे सुरक्षा को सुदृढ़ करने की तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कोलकाता हाई कोर्ट ने TTE के भ्रष्ट आचरण को ‘सब्ज़ी की तरह बेचना’ कहा।
  • दो आरोपियों को हत्या के आरोप में बरी किया, क्योंकि इरादा नहीं सिद्ध हुआ।
  • रेलवे सुरक्षा में सुधार के लिए पुलिस को कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया गया।

कोलकाता हाई कोर्ट ने 7 जुलाई को एक विशेष विभाजन पीठ के समक्ष दो व्यक्तियों को बरी किया, जिन्होंने 2009 में टेस्‍टा‑तोर्सा एक्सप्रेस पर दो यात्रियों की मुठभेड़ के बाद हत्या का आरोप झेला था। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि अभियोजन ने हत्या के इरादे को सिद्ध नहीं किया, जबकि मुख्य अपराध चोरी था।

टिकेट परीक्षकों (TTE) की अनैतिक प्रथा

न्यायालय ने यह उजागर किया कि कई TTE अनरिज़र्व्ड यात्रियों को खाली बर्थ्स के बदले पैसे ले रहे थे, जिसे उन्होंने “मार्केट में सब्ज़ी बेचने जैसा” कहा। इस अनियमित प्रथा ने न केवल यात्रियों के अधिकारों का उल्लंघन किया, बल्कि एक मृत्युदंडी घटना को भी उत्पन्न किया। इस संदर्भ में, न्यायमूर्ति राजशेखर मन्था और बिस्वरूप चौधरी ने रेलवे प्रबंधन को कठोर चेतावनी जारी की।

घटना की पृष्ठभूमि

23 फरवरी 2009 को, न्यू जलपाईगुड़ी से सेल्डा की ओर चल रही टेस्‍टा‑तोर्सा एक्सप्रेस में दो यात्रियों, सुनील कुमार दास और अरुण चक्रवर्ती, ने अनरिज़र्व्ड टिकट लेकर TTE से अतिरिक्त बर्थ्स खरीदे। ट्रेन के स्लीपर कोच में पहुंचते ही दोनों को अर्ध-चेतन अवस्था में पाया गया; दास को तुरंत मृत्यु हो गई, जबकि चक्रवर्ती को कई दिन इलाज करना पड़ा।

अभियोजन के आरोप और जांच की खामियां

अभियोजन ने कहा कि आरोपी ने यात्रियों के साथ दोस्ती बनाकर उन्हें शराब या भोजन में नींद लाने वाली दवाइयाँ मिलाकर बेहोश कर दिया, फिर उनके कीमती सामान चुरा लिया। हालांकि, जांचकर्ता की अयोग्य कार्रवाई, अधूरी साक्ष्य संग्रह और आधे दिल से की गई जांच को कोर्ट ने “अस्वीकार्य” कहा। इस कारण से, अदालत ने पुलिस को अधिक “सच्चे, मेहनती और समर्पित” कदम उठाने का निर्देश दिया।

न्यायालय का आदेश और भविष्य की दिशा

कोर्ट ने इस निर्णय की एक प्रति भारतीय रेल के सभी जनरल मैनेजर्स को भेजने का आदेश दिया, ताकि TTE द्वारा खाली बर्थ्स के अवैध आवंटन पर कड़ी सजा लागू की जा सके। इसके अतिरिक्त, अदालत ने रेलवे सुरक्षा में सुधार के लिए विशेष उपायों की मांग की, जिससे यात्रियों को भविष्य में ऐसे जोखिमों का सामना न करना पड़े।