ईस्ट दिल्ली के एंटी‑ऑटो थिफ्ट स्क्वाड (AATS) में पोस्टेड कंस्टेबल मनीष कुमार ने अपनी 26 वर्षीया पत्नी प्रियांका को साइडवॉक पर हुए झगड़े के दौरान अपनी सर्विस पिस्टल से गोली मार दी। घटना के बाद वह भाग गया और अब पुलिस हत्या केस दर्ज कर उसके पकड़ की तलाश में है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कंस्टेबल मनीष कुमार ने रोडसाइड झगड़े में अपनी पत्नी प्रियांका को गोली मार दी।
  • परिवार ने दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया, जो जांच में शामिल है।
  • हत्याकांड को लेकर पुलिस ने हत्या केस दर्ज कर कंस्टेबल की तलाशी शुरू कर दी है।

दिल्ली पुलिस के एंटी‑ऑटो थिफ्ट स्क्वाड (AATS) में पदस्थ कंस्टेबल मनीष कुमार ने 13 जुलाई को अपने 26 वर्षीया पत्नी, निजी स्कूल की शिक्षिका प्रियांका, को रोडसाइड बहस के दौरान अपनी सर्विस पिस्टल से गोली मार दी। घटना कल्याणपुरी, ईस्ट दिल्ली में दो स्कूटर पर चल रही जोड़ी के बीच हुई, जैसा कि सीसीटीवी फुटेज से स्पष्ट है।

घटना का क्रम और त्वरित प्रतिक्रिया

सीसीटीवी ने दिखाया कि दोनों स्कूटर पर रुकते ही तीव्र बहस शुरू हुई, जिसके बीच मनीष ने अचानक पिस्टल निकाल कर प्रियांका पर गोली चलाई। गोली के बाद वह तुरंत ही मौके से भाग गया। चार‑पांच पासरियों ने तुरंत प्रियांका को ऑटो‑रिक्शा में ले जाकर निकटतम अस्पताल पहुँचाया, परन्तु गंभीर रक्तस्राव के कारण वह वहीं मृत्युविधि से गुजर गई।

दहेज उत्पीड़न के आरोप

प्रियांका के परिवार ने कहा कि शादी के बाद से ही दहेज के लिये लगातार आर्थिक दबाव और उत्पीड़न का सामना किया गया था। परिवार ने पहले महिला सेल में शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसे काउंसलिंग के बाद सुलझा दिया गया था, परन्तु आरोप है कि कंस्टेबल ने फिर भी बार‑बार धन की मांग की। पुलिस ने इन आरोपों को जांच में शामिल कर लिया है और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई करेगी।

पुलिस की कार्यवाही और कानूनी पहलू

हत्याकांड को लेकर दिल्ली पुलिस ने हत्या केस दर्ज कर मनीष कुमार की तलाशी शुरू कर दी है। साथ ही, सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और परिवार की शिकायत को मिलाकर मोटिव, पूर्व इतिहास और संभावित दहेज उत्पीड़न के संबंध में व्यापक जांच चल रही है। यदि कंस्टेबल को दोषी पाया जाता है, तो भारतीय दंड संहिता के तहत हत्या तथा दहेज उत्पीड़न के विशेष प्रावधानों के तहत सख्त सजा हो सकती है।

समाज में दहेज हिंसा की व्यापक समस्या

यह मामला भारत में दहेज से जुड़े घरेलू हिंसा की गहरी जड़ें उजागर करता है। पिछले कुछ वर्षों में दहेज के कारण महिलाओं की हत्या के मामलों में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है, जिससे सामाजिक और कानूनी सुधारों की आवश्यकता पर प्रकाश पड़ता है। इस घटना ने पुनः यह सवाल उठाया है कि पुलिस कर्मियों में भी इस सामाजिक बुराई को रोकने के लिए विशेष प्रशिक्षण और निगरानी की आवश्यकता है।