कर्नाटक के समुद्री शहर मंगलूरु में पुलिस ने बांग्लादेशी अवैध प्रवासियों की तस्करी में शामिल तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई से अब तक 19 अनधिकृत बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान हुई है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रवासी नीतियों पर नया प्रकाश पड़ा है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • मंगलूरु में 3 प्रमुख तस्कर गिरफ्तार
  • अब तक 19 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान
  • कर्नाटक की तटवर्ती क्षेत्रों में संभावित नेटवर्क की जांच जारी

कर्नाटक के समुद्री शहर मंगलूरु में पुलिस ने एक व्यापक ऑपरेशन के तहत तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया, जो बांग्लादेशी अवैध प्रवासियों को भारत में लाने और निर्माण कार्यों में नियोजित करने में संलिप्त थे। गिरफ्तार किए गए लोगों में मोयिद्दिन इस्लाम, दिलावर हुसैन और रसूल इस्लाम शामिल हैं, जो सभी पश्चिम बंगाल के मूल निवासी हैं।

तस्कर नेटवर्क का खुलासा

पुलिस ने बताया कि ये एजेंट उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से श्रमिकों को मंगलूरु में निर्माण कार्यों के लिए लाते थे, जबकि वे भारतीय श्रमिकों को रोजगार दिलाने का दिखावा करके बांग्लादेशी प्रवासियों को भी लुप्त कर रहे थे। इस प्रक्रिया में उन्होंने बांग्लादेशी नागरिकों को वैध पहचान पत्र, जन्म प्रमाणपत्र और पश्चिम बंगाल के पते वाले दस्तावेज़ प्रदान कराना शामिल किया। यह झूठा दस्तावेज़ उन्हें भारतीय नागरिकता का दिखावा करने में मदद करता था।

पहले से ही पहचान में वृद्धि

पहले 11 बांग्लादेशी राष्ट्रीयों को हिरासत में लेने के बाद, स्थानीय पुलिस ने कुल पहचानित अवैध प्रवासियों की संख्या 19 तक बढ़ा दी। उनमें से चार नाबालिग थे, जिससे मानव तस्करी के गंभीर आयाम भी उजागर हुए। पुलिस ने यह भी कहा कि इन प्रवासियों के पास बांग्लादेशी राष्ट्रीय पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज़ थे, जो उनके मूल देश को सिद्ध करते हैं।

क़ानूनी कार्रवाई और आगे की जांच

गिरफ्तारी के बाद, रसूल इस्लाम को कोलकाता में स्थानीय पुलिस की मदद से खोज कर ट्रांज़िट वारंट पर मंगलूरु लाया जाएगा। मामले को विदेशी पंजीकरण कार्यालय (FRRO) को रिपोर्ट किया गया है और प्रवासियों को नियमानुसार डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा, जब तक कि डिपोर्टेशन के आदेश नहीं आते।

समग्र जांच के संकेत

पुलिस ने बताया कि यह केवल एक ही केस नहीं है; वे कर्नाटक के तटवर्ती क्षेत्रों में समान नेटवर्क की संभावनाओं को भी जांच रहे हैं। अब तक 300 से अधिक संदिग्ध व्यक्तियों की जाँच की गई, जिनमें अधिकांश भारतीय नागरिक निकले, जबकि बांग्लादेशी राष्ट्रीयों को कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।