बेंगलुरु के ग्रेटर इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्रोजेक्ट के लिए कर्नाटक सरकार ने चार गांवों में लगभग 4,944 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना जारी की है। मुख्यमंत्री के समीक्षा समिति की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कर्नाटक सरकार ने बिदादी के पास चार गांवों में 4,944.49 एकड़ भूमि के अधिग्रहण के लिए अंतिम अधिसूचना जारी की।
  • इस अधिसूचना में के.जी. गोल्लरपल्या, बन्नीगिरी, अरललुसंद्रा और होसुरु गांव शामिल हैं।
  • मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने परियोजना के गुण-दोषों की जांच के लिए एक समीक्षा समिति गठित करने की घोषणा की है।
  • बेंगलुरु ग्रेटर टाउनशिप प्रोजेक्ट के लिए कुल 9,600 एकड़ भूमि की आवश्यकता है।

बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने 'ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप' (GBIT) परियोजना, जिसे लोकप्रिय रूप से बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट के रूप में जाना जाता है, के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में एक बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को सरकार ने चार राजस्व गांवों में फैले 4,944.49 एकड़ भूमि के अधिग्रहण के लिए अंतिम अधिसूचना जारी कर दी। यह अब तक की सबसे बड़ी भूमि अधिसूचना है।

परियोजना का विस्तार और भौगोलिक विवरण

जारी की गई अंतिम अधिसूचना में मुख्य रूप से चार राजस्व गांव शामिल हैं: के.जी. गोल्लरपल्या, बन्नीगिरी, अरललुसंद्रा और होसुरु। इसमें कुल 4,717.96 एकड़ कृषि भूमि शामिल है। आंकड़ों के अनुसार, होसुरू गांव से 2,390.12 एकड़ और अरललुसंद्रा से 1,460.21 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इस अधिसूचना के साथ ही, सरकार अब तक सात गांवों में कुल 5,462 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर चुकी है।

राजनीतिक और सामाजिक तनाव

यह महत्वपूर्ण विकास ऐसे समय में हुआ है जब मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने परियोजना के लाभों और हानियों का विश्लेषण करने के लिए एक उच्च स्तरीय समीक्षा समिति गठित करने की घोषणा की है। दूसरी ओर, बिदादी के बैरामंगला में किसान इस परियोजना के खिलाफ लगभग 500 दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों का मुख्य मुद्दा भूमि का उचित मुआवजा और उनकी आजीविका का संरक्षण है।

भविष्य की योजनाएं और प्रशासन का रुख

ग्रेटर बेंगलुरु डेवलपमेंट अथॉरिटी (GBDA) के अधिकारियों का कहना है कि परियोजना के लिए आवश्यक हितधारकों की सहमति प्राप्त कर ली गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जो किसान अपनी जमीन देने के इच्छुक हैं, उन्हें तुरंत मुआवजा दिया जाएगा और काम जारी रहेगा। हालांकि, परियोजना के पूर्ण होने के लिए अभी भी 9,600 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, जिसमें बैरामंगला और कांचुगराणाहल्ली जैसे गांव अभी भी प्रक्रिया के अंतिम चरण में हैं।