एक 37 वर्षीय महिला ने बताया कि स्व-घोषित स्वामीजी ने उनके घर में आयोजित ‘विशेष अनुष्ठान’ के बहाने 43 ग्राम सोने के आभूषण और ₹1.3 लाख की रकम चुराई। पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया और आरोपी को खोजने की कार्रवाई शुरू की।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- स्वामीजी ने धार्मिक अनुष्ठान का बहाना बनाकर 43 ग्राम सोना और ₹1.3 लाख चुराए
- पीड़ित ने बताया कि अनुष्ठान के दौरान उसे आँखों में राख डालकर बेहोश कर दिया गया
- बागलगुंटे पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया, आरोपी को पकड़ने की खोज जारी
बेंगलुरु के बागलगुंटे में 37‑वर्षीय गीता ने बताया कि एक स्व-घोषित स्वामीजी, जिन्होंने स्वयं को शिवकली (उपनाम: निथिन) कहा, ने उनके परिवार से 43 ग्राम सोने के आभूषण और ₹1.3 लाख की राशि चुराई। यह घटना 26 जून को हुई, जब स्वामीजी ने गीता को बताया कि उनका छोटा बेटी जीवन‑धमकी में है और केवल विशेष पूजा से ही समाधान होगा।
धोखाधड़ी की विधि
स्वामीजी ने गीता को निर्देश दिया कि घर में कोई भी अन्य व्यक्ति मौजूद न हो, फिर वह घर में प्रवेश कर गया। अनुष्ठान के दौरान उसने पवित्र राख को गीता की आँखों में डाला और पीछे से धक्का देकर उसे बेहोश कर दिया। इस दौरान वह सोने के आभूषण और नकद राशि को ले गया। बाद में स्वामीजी ने कहा कि वह सोना और धन को एक बंडल में बाँध कर घर में ही छोड़ दिया गया है और दो दिन तक न खोलने को कहा, वरना मृत्यु हो सकती है। दो दिनों के बाद गीता ने बंडल खोला तो उसमें केवल इमली के पत्ते मिले।
पुलिस की कार्रवाई
गीता की शिकायत के बाद बागलगुंटे पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया और विस्तृत जांच शुरू की। पुलिस ने स्वामीजी के मोबाइल नंबर को फ्रीज कर दिया है, लेकिन अब तक वह फोन बंद दिखा रहा है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस प्रकार के ‘धार्मिक धोखाधड़ी’ के और भी शिकार हुए हैं।
समाज पर प्रभाव और भविष्य की चेतावनी
इस प्रकार की घटनाएँ सार्वजनिक विश्वास को ठेस पहुँचाती हैं और लोगों को अनावश्यक रूप से आध्यात्मिक सेवाओं के शिकार बनाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक अनुयायियों को ऐसे मामलों में सतर्क रहना चाहिए, दस्तावेज़ी साक्ष्य रखना चाहिए और कोई भी आर्थिक लेन‑देन करने से पहले कानूनी सलाह लेनी चाहिए। इस मामले का न्यायिक परिणाम न केवल पीड़ित के लिए बल्कि ऐसे धोखाधड़ी को रोकने के लिए भी एक मिसाल स्थापित करेगा।