हैदराबाद में नागरिक समाज के समूहों ने सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के समर्थन में और NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर मोमबत्ती मार्च निकाला।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • हैदराबाद के नेकलेस रोड पर सोनम वांगचुक के समर्थन में मोमबत्ती मार्च निकाला गया।
  • प्रदर्शनकारियों ने NEET पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
  • नागरिक समूहों ने NTA को समाप्त करने और छात्र अधिकारों की रक्षा करने की मांग उठाई।
  • तेलंगाना शिक्षा आयोग के पूर्व अध्यक्ष ने परीक्षा के केंद्रीकरण पर संघीय ढांचे को खतरा बताया।

हैदराबाद के नेकलेस रोड पर स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर प्रतिमा के पास गुरुवार शाम को एक विशाल मोमबत्ती मार्च निकाला गया। यह विरोध प्रदर्शन प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और लद्दाख के अधिकारों के पैरोकार सोनम वांगचुक की 19 दिनों से जारी भूख हड़ताल के प्रति एकजुटता दिखाने और NEET परीक्षा में कथित धांधली के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करने के लिए आयोजित किया गया था।

छात्र अधिकारों और जवाबदेही की मांग

नागरिक समाज संगठनों के एक गठबंधन द्वारा आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में 'सोनम वांगचुक को बचाओ' और 'छात्र अधिकारों की रक्षा करें' जैसे स्लोगन वाले पोस्टर लिए हुए थे। प्रदर्शन का मुख्य केंद्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगना था। प्रदर्शनकारियों की तीन प्रमुख मांगें थीं: छात्र अधिकारों की सुरक्षा, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को भंग करना, और शिक्षा मंत्री को पद से हटाना।

केंद्रीकरण बनाम संघीय ढांचा

इस विरोध प्रदर्शन में तेलंगाना शिक्षा आयोग के पूर्व अध्यक्ष अकुनूरी मुरली ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने केंद्र सरकार की चुप्पी पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि सरकार का रवैया चिंताजनक है और ऐसा प्रतीत होता है कि वे किसी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं। मुरली ने विशेष रूप से NTA द्वारा परीक्षाओं के अत्यधिक केंद्रीकरण पर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि यह व्यवस्था भारतीय संघीय ढांचे (Federalism) के विरुद्ध है, क्योंकि राज्य सरकारें अपने स्वयं के प्रवेश परीक्षण आयोजित करने में पूरी तरह सक्षम हैं।

जनता का बढ़ता आक्रोश

प्रदर्शन में शामिल कामकाजी पेशेवरों और शिक्षकों ने भी व्यवस्था पर सवाल उठाए। शिक्षकों का मानना है कि जब तक देश के लाखों छात्रों के माता-पिता इस आंदोलन से नहीं जुड़ते, तब तक बड़े बदलाव की उम्मीद करना कठिन है। यह विरोध प्रदर्शन केवल एक स्थानीय घटना नहीं, बल्कि देश भर में व्याप्त शैक्षणिक भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता के खिलाफ बढ़ते असंतोष का प्रतीक बन गया है।