नीलगिरी की बंद पड़ी हिंदुस्तान फोटो फिल्म्स फैक्ट्री से भारी मात्रा में कीमती धातु युक्त मिट्टी चोरी करने के आरोप में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें एक स्थानीय राजनीतिक नेता भी शामिल है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • नीलगिरी की बंद पड़ी हिंदुस्तान फोटो फिल्म्स (HPF) फैक्ट्री से 3 टन से अधिक मिट्टी चोरी करने के आरोप में 6 लोग गिरफ्तार।
  • चोरी की गई मिट्टी में सिल्वर नाइट्रेट और कीमती धातुओं के अंश होने का संदेह है।
  • गिरफ्तार आरोपियों में उधगमंडलम के वार्ड 2 से TVK पार्टी का शाखा सचिव भी शामिल है।
  • फैक्ट्री 2018 में बंद हो गई थी, लेकिन अब इसके परिसर में कीमती धातुओं की तलाश में अवैध गतिविधियां बढ़ गई हैं।

तमिलनाडु के नीलगिरी जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ पुलिस ने बंद पड़ी हिंदुस्तान फोटो फिल्म्स (HPF) फैक्ट्री के परिसर में अवैध घुसपैठ और कीमती धातु युक्त मिट्टी चोरी करने के आरोप में छह व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने फैक्ट्री परिसर से लगभग तीन टन से अधिक मिट्टी अवैध रूप से निकाली और उसे ले जाने का प्रयास किया।

क्या है पूरा मामला?

जांच में यह बात सामने आई है कि जब यह फैक्ट्री सक्रिय थी, तब फिल्म उत्पादन के दौरान निकलने वाले कीचड़ (sludge) में चांदी (silver) और सोने (gold) के सूक्ष्म अंश मौजूद होते थे। समय के साथ, ये कीमती तत्व फैक्ट्री के कुछ हिस्सों की मिट्टी में जमा हो गए। पुलिस का मानना है कि फैक्ट्री के पुर्जों को कबाड़ में बेचने के लिए नियुक्त किए गए कुछ श्रमिकों ने स्थानीय लोगों को इन कीमती धातुओं के बारे में जानकारी दी, जिसके बाद से मिट्टी चोरी की घटनाएं बढ़ने लगी हैं।

गिरफ्तारी और राजनीतिक कनेक्शन

पुलिस ने शुरुआती चरण में सुरेश, प्रदीन और नितीश कुमार नामक तीन व्यक्तियों को रंगे हाथों पकड़ा था। उनसे गहन पूछताछ के बाद, पुलिस ने तीन अन्य आरोपियों—रवि (उर्फ सुधाकर), हरिहरन और नंदकुमार को भी गिरफ्तार किया। मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब पता चला कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक, सुरेश, उधगमंडलम के वार्ड 2 से तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) का शाखा सचिव है। पुलिस ने मौके से 40 से अधिक बोरियाँ और मिट्टी ले जाने के लिए इस्तेमाल किया गया मालवाहक वाहन भी जब्त किया है।

हिंदुस्तान फोटो फिल्म्स का गौरवशाली इतिहास

नीलगिरी के इंदु नगर में स्थित यह फैक्ट्री 1960 में तत्कालीन मुख्यमंत्री के. कामराज के कार्यकाल के दौरान स्थापित की गई थी। 320 एकड़ वन भूमि पर फैली यह इकाई दक्षिण एशिया के सबसे प्रमुख फोटोग्राफिक फिल्म निर्माण केंद्रों में से एक थी। यहाँ निर्मित ब्लैक-एंड-व्हाइट और एक्स-रे फिल्में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात की जाती थीं। हालांकि, 1990 के दशक के आर्थिक उदारीकरण और नई तकनीक के आगमन के कारण प्रतिस्पर्धा बढ़ने से 2018 में इस ऐतिहासिक संयंत्र का संचालन पूरी तरह बंद हो गया।