NEET परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक का वजन तेजी से गिर रहा है। उन्होंने समर्थकों से उपवास तोड़ने के बजाय 20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल होने की अपील की है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सोनम वांगचुक का वजन घटकर 57.15 किलोग्राम रह गया है।
- वे NEET परीक्षा में अनियमितताओं के लिए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
- 20 जुलाई को 'चलो संसद' मार्च का आह्वान किया गया है।
- कांग्रेस सांसद शशि थरूर सहित कई दिग्गज नेताओं ने उन्हें उपवास समाप्त करने की अपील की है।
नई दिल्ली के जंतर मंतर पर आयोजित अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के पैरोकार सोनम वांगचुक ने अपने भूख हड़ताल के 19वें दिन अपनी बिगड़ती शारीरिक स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, "मैं बहुत अच्छी स्थिति में नहीं हूं, लेकिन स्थिति इतनी भी खराब नहीं है कि हार मान ली जाए।"
स्वास्थ्य की गंभीर स्थिति और चिकित्सा निगरानी
चिकित्सकीय बुलेटिन के अनुसार, 59 वर्षीय वांगचुक का वजन तेजी से गिरकर 57.15 किलोग्राम पर आ गया है। पिछले 24 घंटों में उनका वजन 400 ग्राम और भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से लगभग 8.9 किलोग्राम कम हो चुका है। वर्तमान में उन्हें 24 घंटे चिकित्सा निगरानी में रखा गया है। हालांकि उनका रक्तचाप (105/76 mmHg) और ऑक्सीजन स्तर (97%) स्थिर है, लेकिन डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि उनकी शारीरिक कमजोरी चिंताजनक है।
NEET विवाद और राजनीतिक दबाव
यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से NEET परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों के विरोध में है। प्रदर्शनकारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस आंदोलन ने अब राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक भावुक पत्र लिखकर वांगचुक से उपवास तोड़ने की अपील की है, ताकि वे संसद के भीतर अपनी आवाज उठा सकें। इसके अलावा ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं ने भी स्वास्थ्य की चिंता जताते हुए संवाद की मांग की है।
आगामी रणनीति: 'चलो संसद' मार्च
सोनम वांगचुक ने अपने समर्थकों से एक महत्वपूर्ण अपील की है। उन्होंने कहा कि वे उनसे उपवास तोड़ने के लिए न कहें, बल्कि 20 जुलाई को आयोजित होने वाले 'चलो संसद' शांतिपूर्ण मार्च में शामिल हों। यह मार्च संसद की ओर एक विशाल जनसमूह के साथ प्रदर्शन करने की रणनीति का हिस्सा है। वहीं, दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई है, जिसमें वांगचुक के स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें तत्काल अस्पताल स्थानांतरित करने और आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान करने की मांग की गई है।