कोझिकोड की अदालत ने 'काफिर' स्क्रीनशॉट मामले के मुख्य आरोपी और DYFI नेता जिथिन भास्करन की जमानत रद्द करने की SIT की मांग को खारिज कर दिया है। अभियोजन पक्ष ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया था।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कोझिकोड की वडाकरा न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने SIT की याचिका खारिज की।
- मुख्य आरोपी जिथिन भास्करन (DYFI नेता) को राहत मिली।
- SIT का आरोप था कि भास्करन ने फेसबुक पोस्ट के जरिए जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया।
- यह मामला केरल चुनाव के दौरान धार्मिक रूप से संवेदनशील स्क्रीनशॉट वायरल होने से जुड़ा है।
केरल के चर्चित 'काफिर' स्क्रीनशॉट मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ आया है। कोझिकोड स्थित वडाकरा न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट अदालत ने शुक्रवार को विशेष जांच दल (SIT) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मुख्य आरोपी जिथिन भास्करन की जमानत रद्द करने की मांग की गई थी। भास्करन, जो डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के स्थानीय नेता हैं, इस पूरे विवाद के केंद्र में रहे हैं।
क्या था अभियोजन पक्ष का तर्क?
विशेष जांच दल (SIT) ने अदालत में दलील दी थी कि 3 जुलाई को जमानत पर रिहा होने के बाद, भास्करन ने जमानत की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन किया है। अभियोजन पक्ष का दावा था कि भास्करन ने फेसबुक पर कुछ ऐसे संदेश पोस्ट किए जो जांच टीम की कार्यप्रणाली को चुनौती देते थे। इसके अलावा, SIT ने यह भी चिंता जताई कि आरोपी स्थानीय स्तर पर अशांति फैलाने और जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का प्रयास कर रहा था।
विवाद की जड़: 'काफिर' स्क्रीनशॉट मामला
यह पूरा विवाद केरल में वडाकरा लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान शुरू हुआ था। मामला एक ऐसे विवादास्पद स्क्रीनशॉट के प्रसार से जुड़ा है, जिसमें कांग्रेस उम्मीदवार शाफी परंबिल को एक कट्टर मुस्लिम के रूप में दिखाया गया था, जबकि सीपीआई(एम) की उम्मीदवार के.के. शैलजा को 'काफिर' (गैर-विश्वासी) के रूप में चित्रित किया गया था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि इस पोस्ट को गलत तरीके से मुस्लिम यूथ लीग के कार्यकर्ता मोहम्मद कासिम के नाम से जोड़ा गया था, जिससे सांप्रदायिक तनाव पैदा होने का खतरा बढ़ गया था।
जांच और डिजिटल साक्ष्य
SIT के अनुसार, जिथिन भास्करन ने व्हाट्सएप के 'ब्रॉडकास्ट' फीचर का उपयोग करके लगभग 200 लोगों को यह विवादित स्क्रीनशॉट भेजा था। जांच टीम ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट करने की कोशिश की, लेकिन जिला फोरेंसिक विभाग ने महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए हैं। भास्करन को 16 जून, 2026 को गिरफ्तार किया गया था। अदालत द्वारा जमानत बरकरार रखने के फैसले ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।