कन्नियाकुमारी में सबरी वर्मन की हिरासत में हुई संदिग्ध मौत के बाद, उनके परिवार ने विशेषज्ञों द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट की पुष्टि होने तक शव लेने से इनकार कर दिया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सबरी वर्मन की हिरासत में मौत के मामले में परिवार ने सरकारी सहायता लेने से इनकार किया।
- परिवार पोस्टमार्टम वीडियो फुटेज की विशेषज्ञों से जांच करवाना चाहता है।
- मानवाधिकार संगठन 'पीपल्स वॉच' मामले की फोरेंसिक जांच में सहायता कर रहा है।
- प्रशासनिक अधिकारियों और मंत्रियों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की।
तमिलनाडु के कन्नियाकुमारी जिले के नागरकोइल से एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां 35 वर्षीय सबरी वर्मन की न्यायिक हिरासत में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। इस घटना ने एक बार फिर पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्मन के परिजनों ने प्रशासन के प्रति गहरा अविश्वास व्यक्त करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वे तब तक शव स्वीकार नहीं करेंगे, जब तक कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट की सत्यता की विशेषज्ञों द्वारा पुष्टि नहीं कर दी जाती।
प्रशासनिक मुलाकात और परिवार का रुख
गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को, तमिलनाडु के मंत्री एस. राजेश कुमार और श्रीनाथ ने जिला कलेक्टर एम. प्रताप और पुलिस अधीक्षक आर. स्टालिन के साथ वर्मन के परिवार से मुलाकात की। मंत्रियों का उद्देश्य परिवार को वित्तीय सहायता प्रदान करना था, लेकिन परिवार ने इस सहायता को लेने से साफ इनकार कर दिया। परिजनों का तर्क है कि जब तक उन्हें मृत्यु के वास्तविक कारणों का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिल जाता, तब तक किसी भी मुआवजे का कोई महत्व नहीं है।
मानवाधिकारों की मांग और फोरेंसिक जांच
सबरी वर्मन की बहन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि परिवार पोस्टमार्टम की वीडियो फुटेज को मानवाधिकार संगठन 'पीपल्स वॉच' (People’s Watch) को भेजने की योजना बना रहा है। वे इस फुटेज को एक स्वतंत्र डॉक्टर से दिखाना चाहते हैं ताकि एक 'सेकंड ओपिनियन' प्राप्त किया जा सके। मानवाधिकार कार्यकर्ता हेनरी तिफैन ने पुष्टि की है कि फुटेज के विभिन्न हिस्सों को संकलित किया जा रहा है ताकि इसे फोरेंसिक विशेषज्ञों के पास विस्तृत विश्लेषण के लिए भेजा जा सके।
कानूनी कार्रवाई और पृष्ठभूमि
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, प्रशासन ने पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में आठ जेल कैदियों और जेल के मुख्य वार्डर सहित दो वार्डरों को गिरफ्तार किया गया है। यह घटना हिरासत में सुरक्षा प्रोटोकॉल की विफलता को दर्शाती है। अब सबकी निगाहें फोरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि यह मामला वास्तव में लापरवाही का है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है।