राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा NEET‑UG 2026 की पुनः परीक्षा में 11.21 लाख उम्मीदवार सफल हुए, जिसमें महिलाओं की सफलता दर पुरुषों से अधिक रही। वहीं दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनाम वांगचुक के स्वास्थ्य की देखरेख के लिए सरकार को नियमित निगरानी का आदेश दिया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • NEET‑UG 2026 पुनः परीक्षा में 11.21 लाख उम्मीदवार उत्तीर्ण
  • महिला उम्मीदवारों की सफलता दर पुरुषों से अधिक
  • दिल्ली हाई कोर्ट ने वांगचुक के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी का आदेश दिया

राष्ट्रीय पात्रता cum प्रवेश परीक्षा (NEET‑UG) 2026 की पुनः परीक्षा का परिणाम राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने जारी किया, जिसमें कुल 11.21 लाख अभ्यर्थियों ने उत्तीर्ण अंक प्राप्त किए। यह परीक्षा जून 21 को हुई, जब पिछले माह के मूल परीक्षा को पेपर लीक के संदेह के कारण रद्द कर दिया गया था। लगभग 20 लाख छात्रों ने इस पुनः परीक्षा में भाग लिया, जिससे भारत के मेडिकल प्रवेश में एक बड़ा बदलाव आया।

महिलाओं ने पुरुषों पर किया दबदबा

डेटा से स्पष्ट होता है कि महिलाओं ने पुरुष उम्मीदवारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। महिला उम्मीदवारों की पास दर लगभग 57% रही, जबकि पुरुषों की पास दर 48% के आसपास थी। इस अंतर का कारण शिक्षा में लैंगिक समानता की दिशा में हुए सुधार, साथ ही ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए विशेष सहायक उपाय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुझान भविष्य में मेडिकल प्रोफेशन में लैंगिक संतुलन को बेहतर बना सकता है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने वांगचुक की स्वास्थ्य देखभाल पर आदेश दिया

सोनाम वांगचुक, जो जंतर mantar में 19वें दिन अपने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं, की स्थिति गंभीर हो गई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने संघ और दिल्ली सरकार को आदेश दिया है कि वे उनकी स्वास्थ्य स्थिति की नियमित निगरानी करें। डॉक्टर सतीश लम्बा ने बताया कि वांगचुक ने 9 किलोग्राम से अधिक वजन घटाया है, लेकिन वे मानसिक रूप से सतर्क बने हुए हैं। यह आदेश हड़ताल के मानवीय पहलुओं को उजागर करता है और भविष्य में समान मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप की दिशा स्थापित करता है।

अन्य प्रमुख समाचार

मॉनसून सत्र में पारित होने वाले पाँच नए बिलों में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान के लिए सजा बढ़ाने वाला "Vande Mataram" संशोधन बिल और जन्म‑मृत्यु पंजीकरण में देरी पर कड़ी सजा का प्रावधान शामिल है। साथ ही, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अपने कैबिनेट को भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता का संकेत दिया, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने वृद्ध एवं टर्मिनली बीमार कैदियों के लिए शीघ्र रिहाई की नीति बनाने का आदेश जारी किया।

इन विकासों से स्पष्ट है कि भारत में शिक्षा, न्याय और सामाजिक नीति के क्षेत्रों में परिवर्तन तेज़ी से हो रहा है, जिससे नागरिकों को अधिक पारदर्शिता और अधिकार मिल रहे हैं।