श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दान में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही SIT सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच दल अतिरिक्त समय की मांग भी कर सकता है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • SIT सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर दान घोटाले पर अंतरिम रिपोर्ट पेश कर सकती है।
  • जांच दल वित्तीय अनियमितताओं की गहराई से जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से और समय मांग सकता है।
  • इस मामले में पहले ही आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है।
  • याचिकाकर्ता अब मामले की CBI और CAG द्वारा जांच की मांग कर रहे हैं।

अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दान कोष में हुई कथित वित्तीय हेराफेरी का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) सोमवार को माननीय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी अंतरिम स्टेटस रिपोर्ट पेश कर सकती है। यह कदम अदालत के उस निर्देश के बाद उठाया जा रहा है, जिसमें जांच की निष्पक्षता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखने को कहा गया था।

जांच का घटनाक्रम और अब तक की कार्रवाई

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था। इस पैनल में लखनऊ मंडल आयुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं। जांच के शुरुआती चरणों में ही बड़ी कार्रवाई देखने को मिली थी; 23 जून को सौंपी गई नौ पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई और आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान मंदिर के दान से गायब किया गया नकद भी बरामद हुआ है।

नेतृत्व में बड़े बदलाव और प्रशासनिक सुधारों की मांग

इस घोटाले के सामने आने के बाद ट्रस्ट के भीतर भी बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक परिणाम देखने को मिले हैं। पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों का कहना है कि SIT की अंतिम रिपोर्ट में मंदिर के प्रशासनिक ढांचे और दान गणना प्रणाली (Donation-counting mechanism) में व्यापक सुधारों की सिफारिश की जा सकती है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और भविष्य की राह

वर्तमान में, मामला केवल SIT की जांच तक सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में ऐसी याचिकाएं लंबित हैं जिनमें मामले की CBI जांच, फोरेंसिक ऑडिट और CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) द्वारा ऑडिट की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया है कि FIR दर्ज होने से पहले ही SIT ने जांच क्यों शुरू कर दी थी। अब सबकी निगाहें सोमवार को आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस पवित्र संस्थान के वित्तीय प्रबंधन की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकती है।