ऑल इंडिया महिला सांस्कृतिक संगठन (AIMSS) ने धारवाड़ में किशोरियों में बढ़ती गर्भावस्था के मामलों और लंबित सामाजिक सुरक्षा पेंशन को लेकर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने बाल तस्करी के बढ़ते संदेह पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

मुख्य बातें

  • धारवाड़ में 14-18 वर्ष की आयु की किशोरियों में गर्भावस्था के मामलों में भारी वृद्धि।
  • रिश्तेदारों और परिचितों द्वारा यौन शोषण के बढ़ते मामलों पर चिंता।
  • बच्चों की बिक्री के लिए एक संगठित रैकेट होने का संदेह।
  • बुजुर्गों और विधवाओं की रुकी हुई सामाजिक सुरक्षा पेंशन जारी करने की मांग।

धारवाड़: ऑल इंडिया महिला सांस्कृतिक संगठन (AIMSS) के सदस्यों ने शुक्रवार को धारवाड़ के उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपकर जिले में किशोरियों में बढ़ती गर्भावस्था के मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त की। संगठन ने न केवल इस गंभीर सामाजिक मुद्दे पर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की, बल्कि लंबित सामाजिक सुरक्षा पेंशन को तुरंत जारी करने का भी आग्रह किया।

प्रदर्शन के दौरान AIMSS की जिला अध्यक्ष मधुलाता गौड़ा और सचिव गंगुबाई कोकरे के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने उपायुक्त कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया। संगठन का आरोप है कि पिछले दो से तीन वर्षों में जिले में किशोरियों में गर्भावस्था के मामलों में चौंकाने वाली वृद्धि हुई है, जो समाज के लिए एक खतरे की घंटी है।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मुद्दा केवल स्वास्थ्य से नहीं बल्कि सुरक्षा और सामाजिक नैतिकता से भी जुड़ा है। RCH (प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य) पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, 14 से 18 वर्ष की आयु की लड़कियां सबसे अधिक प्रभावित हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि फिल्मों में अश्लीलता, शराब और नशीले पदार्थों का बढ़ता चलन इस समस्या को और अधिक जटिल बना रहा है।

किशोरियों का यौन शोषण और उनके बच्चों का संदिग्ध परिस्थितियों में गोद दिया जाना एक बड़े संगठित अपराध की ओर इशारा करता है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि हाल ही में नाबालिग लड़कियों द्वारा बच्चों को जन्म देने और फिर उन नवजात शिशुओं को गोद दिए जाने की घटनाओं ने एक 'चाइल्ड सेलिंग रैकेट' (बच्चों की बिक्री का गिरोह) होने के संदेह को जन्म दिया है। AIMSS ने उपायुक्त स्नेहल आर. से मांग की है कि दोषियों को सख्त सजा दी जाए और सुरक्षात्मक उपाय लागू किए जाएं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत के कई हिस्सों में किशोर स्वास्थ्य और सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। RCH पोर्टल के माध्यम से डेटा का संग्रह किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर जागरूकता और सुरक्षा उपायों की कमी के कारण किशोरियों के खिलाफ अपराधों में वृद्धि देखी जा रही है।

क्या आप जानते हैं?: भारत में किशोर स्वास्थ्य और पोषण संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) चलाया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. AIMSS ने उपायुक्त से क्या मांग की है?
AIMSS ने किशोरियों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाने और बुजुर्गों व विधवाओं की रुकी हुई पेंशन जारी करने की मांग की है।

2. गर्भावस्था के मामलों में किस आयु वर्ग की लड़कियां अधिक प्रभावित हैं?
RCH पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, 14 से 18 वर्ष की आयु की लड़कियां सबसे अधिक प्रभावित हैं।