RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि आज के दौर में माता-पिता को बच्चों पर हुक्म चलाने के बजाय उनके साथ संवाद स्थापित करना चाहिए। उन्होंने आधुनिक जीवनशैली और डिजिटल उपकरणों के कारण परिवारों में बढ़ती दूरी पर चिंता जताई है।
मुख्य बातें
- मोहन भागवत ने 'आदेश' के बजाय 'संवाद' पर जोर दिया।
- डिजिटल स्क्रीन और काम के दबाव के कारण परिवारों में बातचीत कम हो रही है।
- माता-पिता को बच्चों के सवालों का जवाब देने के लिए खुद को तैयार करना होगा।
- बच्चों के लिए केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि नैतिक उदाहरण जरूरी हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण संबोधन में कहा कि आज के परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सत्ता या अधिकार के बजाय संवाद के माध्यम से युवा पीढ़ी से जुड़ना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि "आज के युवाओं को आदेश (Dictation) की नहीं, बल्कि चर्चा (Discussion) की आवश्यकता है।"
यह कार्यक्रम विश्व मंगल्या सभा द्वारा आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य सशक्त मातृत्व और सांस्कृतिक सद्भाव को बढ़ावा देना है। भागवत का यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब जंतर-मंतर के पास छात्र परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
बदलते दौर में परवरिश का तरीका
अपने भाषण, जिसका विषय 'युग अनुकूल मातृत्व' था, में भागवत ने कहा कि समय के साथ परवरिश के तरीकों में बदलाव आना चाहिए। उन्होंने पुरानी पीढ़ी और आज की पीढ़ी के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा, "एक समय था जब आज्ञापालन स्वाभाविक था, लेकिन आज की पीढ़ी सवाल पूछती है और वे ऐसा सही भी करते हैं। वे कारणों और स्पष्टीकरणों की मांग करते हैं।"
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि आधुनिक युग में सूचनाओं की अधिकता और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने बच्चों में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। ऐसे में माता-पिता की भूमिका केवल नियम बनाने वाले की नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक की होनी चाहिए जो जटिल सवालों के जवाब दे सके।
आज की परवरिश आदेशों के बारे में नहीं, बल्कि आम सहमति और चर्चा के बारे में होनी चाहिए।
भागवत ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि माता-पिता और बच्चे दोनों ही अपने-अपने स्क्रीन (मोबाइल/लैपटॉप) में इतने व्यस्त हैं कि एक ही घर में रहकर भी एक-दूसरे से कटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल यह नहीं सुनना है कि क्या सही है, बल्कि वे अपने माता-पिता के आचरण को देखते हैं। यदि माता-पिता खुद वैसा नहीं करते जैसा वे सिखाते हैं, तो बच्चे उन पर भरोसा नहीं करते।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. मोहन भागवत ने युवाओं के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल आदेश देना पर्याप्त नहीं है, उन्हें तर्क और चर्चा के माध्यम से समझाना आवश्यक है।
2. उन्होंने परिवारों में किस समस्या की ओर इशारा किया?
उन्होंने मोबाइल और काम के कारण परिवारों के बीच होने वाली बातचीत में कमी और बढ़ती दूरी पर चिंता जताई।