सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने हाल ही में सनातन धर्म और युवाओं के आंदोलन को लेकर दिए गए अपने विवादास्पद बयान पर स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने धर्म और अध्यात्म के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए ट्रोलर्स को जवाब दिया है।

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मुख्य बातें

  • गीतांजलि आंगमो ने सनातन धर्म और अध्यात्म के बीच अंतर स्पष्ट किया।
  • युवाओं के आंदोलन को धार्मिक रंग देने के आरोपों पर उन्होंने सफाई दी।
  • उन्होंने कहा कि सनातन धर्म भारतीय सभ्यता की बुनियाद है, न कि कोई राजनीतिक हथियार।

सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो पिछले कुछ हफ्तों से युवाओं के आंदोलन के दौरान काफी चर्चा में रही हैं। हाल ही में उनके एक सोशल मीडिया पोस्ट ने विवाद खड़ा कर दिया था, जिसमें उन्होंने युवाओं के साहस और आचरण को 'सनातन धर्म' से जोड़ दिया था। इस पोस्ट के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर भारी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा।

विवाद के बाद गीतांजलि ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, "ट्रोल करने वालों से मेरी अपील है कि धर्म और अध्यात्म को एक न समझें। धर्म से प्रभावित राजनीति लोगों को बांट सकती है, लेकिन अध्यात्म से प्रेरित राजनीति लोगों को जोड़ती है।" उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि सनातन धर्म भारतीय सभ्यता की नींव है और कोई भी राजनीतिक दल इस पर अपना एकाधिकार नहीं जता सकता।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह विवाद इस बात को रेखांकित करता है कि कैसे सामाजिक आंदोलनों को अक्सर धार्मिक या राजनीतिक चश्मे से देखने की कोशिश की जाती है। गीतांजलि का बयान एक गहरी वैचारिक बहस को जन्म देता है कि क्या राष्ट्रवाद और धर्म को अलग रखा जा सकता है या नहीं।

"सनातन धर्म को संकीर्ण राजनीतिक अर्थों से ऊपर उठकर देखना ही वास्तविक समझ है।"

इससे पहले गीतांजलि ने एक पोस्ट में लिखा था कि भारत की 'जेन ज़ी' (Gen Z) ने दिखाया है कि बिना नफरत और हिंसा के भी अन्याय के खिलाफ खड़ा हुआ जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया था कि हिंदू राष्ट्रवादी पार्टियों को युवाओं से राष्ट्रवाद का असली अर्थ सीखना चाहिए। इस टिप्पणी को आलोचकों ने आंदोलन को धार्मिक रंग देने की कोशिश माना।

आलोचकों में नितिन सेठी और आशीष बागची जैसे नाम शामिल रहे, जिन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह आंदोलन वास्तव में केवल एक धर्म तक सीमित था? वहीं, गीतांजलि का बचाव करने वालों का कहना है कि उनका उद्देश्य धर्म का प्रचार करना नहीं, बल्कि नैतिक आचरण की बात करना था।

Did You Know?: गीतांजलि आंगमो ने बताया कि वे एक जैन परिवार से आती हैं और उन्होंने अपने परिवार में लंबे समय तक उपवास करने की परंपरा देखी है, जिससे उन्हें शक्ति मिलती है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: गीतांजलि आंगमो क्यों ट्रोल हुई थीं?
उत्तर: उन्होंने युवाओं के आंदोलन और उनके नैतिक आचरण को 'सनातन धर्म' से जोड़कर पोस्ट किया था, जिसे आलोचकों ने सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश माना।

प्रश्न 2: गीतांजलि की सफाई का मुख्य बिंदु क्या था?
उत्तर: उन्होंने धर्म और अध्यात्म के बीच अंतर बताया और कहा कि सनातन धर्म भारतीय सभ्यता का आधार है, न कि राजनीति का उपकरण।