भारत में स्नातकों की संख्या 13 गुना बढ़ी, पर बेरोजगारी की दर में काफी बदलाव नहीं आया। आज दो में से तीन बेरोजगार युवाओं के पास डिग्री है, जो 1983 में केवल एक आठवें हिस्से के बराबर था। यह स्थिति उच्च शिक्षा की मात्रा और रोजगार के अवसरों के असंतुलन को उजागर करती है।
मुख्य बिंदु
- 20‑29 वर्षों के 6.3 करोड़ स्नातक, लेकिन 1.1 करोड़ बेरोजगार।
- 25‑29 आयु वर्ग में बेरोजगारी 12.2% से 20% तक बढ़ी।
- महिला स्नातकों की बेरोजगारी राष्ट्रीय औसत 36.6% तक पहुँच गई।
परिचय
अज़िम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की 2026 की स्टेट ऑफ़ वर्किंग इंडिया रिपोर्ट बताती है कि भारत में स्नातकों की संख्या 1983 के 50 लाख से बढ़कर 6.3 करोड़ हो गई है, जबकि उसी अवधि में बेरोजगार स्नातकों की संख्या 7 लाख से 1.1 करोड़ तक बढ़ी है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1983 में स्नातकों का रोजगार दर अपेक्षाकृत बेहतर था; 25‑29 आयु वर्ग के स्नातकों में बेरोजगारी 12.2% थी। आज वही वर्ग 20% तक पहुँच गया है, जो चार दशकों में लगभग दोगुना हो गया है। यह दर्शाता है कि उच्च शिक्षा का विस्तार रोजगार सृजन के साथ तालमेल नहीं बिठा पाया।
राज्यवार असमानता
स्नातक पुरुषों की बेरोजगारी दिल्ली में 8.8% से ओडिशा में 40.3% तक है। स्नातक महिलाओं की दर जम्मू‑कश्मीर में 73.5% तक पहुँच गई, जबकि महाराष्ट्र, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में यह दर पुरुषों से कम है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the widening gap between graduate supply and quality jobs threatens India’s demographic dividend, turning it into a potential development liability if not addressed swiftly.
"स्नातकों की बढ़ती संख्या को सुसंगत कौशल और उद्योग‑उन्मुख प्रशिक्षण के बिना नौकरी नहीं मिल पाएगी," कहते हैं अर्थशास्त्री डॉ. रजत सिंह।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या स्नातक होने से वेतन में वास्तविक अंतर है?
उत्तर: हाँ, स्नातकों का शुरुआती वेतन गैर‑स्नातकों से लगभग दो गुना अधिक है, लेकिन यह प्रीमियम धीरे‑धीरे घट रहा है।
प्रश्न 2: सरकार किस दिशा में कार्य कर रही है?
उत्तर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतियों को कौशल विकास और रोजगार सृजन के साथ जोड़ने का आह्वान किया है, पर कार्यान्वयन में अभी भी अंतर है।