भारत में साइबर धोखाधड़ी के मामलों में 2020 से 2024 के बीच भारी उछाल देखा गया है, जिसमें तेलंगाना सबसे अधिक प्रभावित राज्य बनकर उभरा है। सरकार ने राज्यसभा में बताया कि ऑनलाइन बैंकिंग और कार्ड धोखाधड़ी प्रमुख खतरे हैं।

मुख्य बातें

  • 2020 में 10,395 मामलों से बढ़कर 2024 में साइबर धोखाधड़ी के मामले 29,758 तक पहुँच गए।
  • तेलंगाना में सर्वाधिक 18,922 साइबर अपराध दर्ज किए गए।
  • ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है।
  • CFCFRMS पोर्टल के माध्यम से अब तक ₹11,158 करोड़ से अधिक की राशि बचाई जा चुकी है।

भारत में डिजिटल सुरक्षा को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। गृह मंत्रालय के राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने बुधवार को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि 2020 से 2024 के बीच देश में साइबर धोखाधड़ी के मामलों में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, जहाँ 2020 में केवल 10,395 मामले दर्ज थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 29,758 हो गई है।

राज्यवार स्थिति और प्रमुख श्रेणियां

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि राज्यों के बीच साइबर अपराध का वितरण असमान है। 2024 में तेलंगाना ने 18,922 मामलों के साथ शीर्ष स्थान प्राप्त किया। इसके बाद बिहार (4,020), महाराष्ट्र (2,827) और ओडिशा (1,546) का स्थान रहा। धोखाधड़ी के तरीकों में ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड (4,659 मामले) सबसे ऊपर है, जिसके बाद क्रेडिट/डेबिट कार्ड फ्रॉड और निवेश धोखाधड़ी का नंबर आता है।

धोखाधड़ी का प्रकारमामलों की संख्या (2024)
ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड4,659
क्रेडिट/डेबिट कार्ड फ्रॉड3,829
मार्केटिंग/निवेश धोखाधड़ी3,044
ATM धोखाधड़ी1,659

यह क्यों मायने रखता है

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था डिजिटल हो रही है, साइबर अपराधियों के लिए अवसर भी बढ़ रहे हैं। बैंकिंग और निवेश से जुड़ी धोखाधड़ी का बढ़ता स्तर यह दर्शाता है कि नागरिकों की डिजिटल साक्षरता और सुरक्षा प्रोटोकॉल में अभी भी बड़े अंतराल हैं।

डिजिटल अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए केवल तकनीकी समाधान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि नागरिक जागरूकता ही सबसे बड़ी ढाल है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पिछले पांच वर्षों में भारत ने डिजिटल भुगतान में क्रांति देखी है, लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों की जटिलता भी बढ़ी है। 2021 में 'सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम' (CFCFRMS) की शुरुआत की गई थी ताकि वित्तीय धोखाधड़ी की तुरंत रिपोर्टिंग की जा सके और धन के हस्तांतरण को रोका जा सके।

क्या आप जानते हैं?: CFCFRMS पोर्टल की मदद से अब तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों के माध्यम से ₹11,158 करोड़ से अधिक की राशि बचाई जा चुकी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. सबसे अधिक साइबर धोखाधड़ी किस राज्य में हो रही है?
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना में साइबर धोखाधड़ी के मामले सबसे अधिक दर्ज किए गए हैं।

2. साइबर अपराध की रिपोर्ट कहाँ करें?
नागरिक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।