सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों द्वारा तत्काल मामलों की मांग (mentioning) के दौरान लाइव स्ट्रीम की ऑडियो म्यूट करने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि यह एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, न्यायिक कार्यवाही नहीं।

मुख्य बिंदु

  • सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों द्वारा तत्काल मामलों की मांग के दौरान लाइव ऑडियो म्यूट कर दिया है।
  • CJI सूर्यकांत ने कहा कि 'मेंशनिंग' एक प्रशासनिक कार्य है, न्यायिक कार्यवाही नहीं।
  • यह निर्णय मीडिया द्वारा टिप्पणियों की गलत रिपोर्टिंग को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।
  • अदालत ने पहले ही सोशल मीडिया पर अदालती कार्यवाही के वीडियो साझा करने पर प्रतिबंध लगाया है।

नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को वकीलों द्वारा तत्काल मामलों की मांग (mentioning) के दौरान लाइव स्ट्रीम की आवाज (audio) को म्यूट करने का निर्णय लिया। लाइव वीडियो फीड के दौरान ऑडियो को उस समय बंद कर दिया गया जब वकील मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष नए मामलों को सूचीबद्ध करने का अनुरोध कर रहे थे।

वकीलों द्वारा 'मेंशनिंग' सुबह की अदालती दिनचर्या का हिस्सा है, जहां वे मुख्य न्यायाधीश से मामलों की तत्काल सुनवाई के लिए अनुरोध करते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान, CJI यह तय करते हैं कि क्या किसी मामले में तत्काल सुनवाई की आवश्यकता है और सुनवाई की तारीख तय करते समय संक्षिप्त मौखिक टिप्पणियां भी कर सकते हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कदम न्यायिक गरिमा और प्रशासनिक कार्यप्रणाली के बीच की रेखा को स्पष्ट करने का एक प्रयास है। हाल के महीनों में, कई राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मामलों में 'मेंशनिंग' के दौरान की गई टिप्पणियों को मीडिया द्वारा व्यापक रूप से रिपोर्ट किया गया है, जिससे कभी-कभी विवाद की स्थिति पैदा हो गई है।

'मेंशनिंग' एक प्रशासनिक अभ्यास है न कि न्यायिक कार्यवाही, इसलिए इसे रिपोर्ट नहीं किया जाना चाहिए। - CJI सूर्यकांत

हाल ही में, CJI सूर्यकांत ने मीडिया की आलोचना करते हुए कहा था कि उनकी टिप्पणियों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत का उद्देश्य 24x7 मनोरंजन चैनल बनना नहीं है। अदालत ने पहले ही कार्यवाही के वीडियो रिकॉर्ड करने और उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर अपनी कार्यवाही की गोपनीयता और गरिमा बनाए रखने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं। हाल के वर्षों में, डिजिटल लाइव स्ट्रीमिंग के बढ़ने के साथ, अदालत ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि सूचना का प्रसार न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप न करे।

क्या आप जानते हैं?: 'मेंशनिंग' वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से वकील अदालत से किसी मामले को सामान्य क्रम से हटाकर तत्काल सुनवाई के लिए अनुरोध करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या मीडिया अभी भी अदालती कार्यवाही की रिपोर्ट कर सकता है?
हाँ, अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय समाचार रिपोर्टिंग को नहीं रोकता है, यह केवल लाइव ऑडियो म्यूट करने तक सीमित है।

2. 'मेंशनिंग' क्या है?
यह सुबह की एक प्रशासनिक प्रक्रिया है जहाँ वकील तत्काल सुनवाई के लिए मामलों को सूचीबद्ध करने का अनुरोध करते हैं।