अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या में भारी उछाल देखा गया है, लेकिन बिना पंजीकरण और स्वास्थ्य जांच के आने वाले भक्तों ने श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन ने सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को बनाए रखने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

मुख्य बातें

  • अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है।
  • बिना अनिवार्य स्वास्थ्य जांच और पंजीकरण के आने वाले भक्तों से सुरक्षा जोखिम बढ़ रहा है।
  • प्रशासन ने पहलगाम और बालटाल मार्गों के लिए प्रतिदिन 10,000 यात्रियों की सीमा तय की है।
  • अनिवार्य RFID कार्ड के बिना बेस कैंप की ओर बढ़ने पर रोक लगाई गई है।

जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा 2026 के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, रविवार को कुल 32,313 श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा मंदिर के दर्शन किए, जिसमें से 20,145 यात्री अकेले दूसरे दिन ही पहुंचे, जो पिछले कई वर्षों का रिकॉर्ड है।

हालांकि, इस भारी भीड़ के साथ-साथ श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड (SASB) के सामने गंभीर चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं। बोर्ड ने विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के बारे में चिंता व्यक्त की है जो बिना किसी पूर्व पंजीकरण और अनिवार्य स्वास्थ्य जांच के यात्रा पर निकल रहे हैं। उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ट्रेकिंग करने के लिए स्वास्थ्य फिटनेस अनिवार्य है, और बिना जांच के आने वाले भक्त न केवल स्वयं को खतरे में डाल रहे हैं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी दबाव डाल रहे हैं।

क्यों है यह चिंता का विषय?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बिना पंजीकरण वाले यात्रियों के कारण यात्रा के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर भारी दबाव पड़ रहा है। अनियंत्रित भीड़ के कारण बेस कैंपों पर संसाधनों की कमी हो सकती है और आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों को संभालना कठिन हो सकता है। वर्तमान में, प्रतिदिन लगभग 2,500 मरीज विशेष रूप से बनाए गए आउटपेशेंट विभाग (OPD) में इलाज करा रहे हैं।

बिना पंजीकरण और स्वास्थ्य प्रमाण पत्र के यात्रा करना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह उच्च ऊंचाई वाली परिस्थितियों में जानलेवा भी हो सकता है।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने यात्रियों से धैर्य बनाए रखने और नियमों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा कारणों से प्रतिदिन यात्रियों की संख्या पर कैप (सीमा) लगाई गई है। पहलगाम मार्ग के लिए 10,000 और बालटाल मार्ग के लिए भी 10,000 यात्रियों की सीमा तय की गई है, जिसे किसी भी स्थिति में बढ़ाया नहीं जाएगा।

ऐतिहासिक संदर्भ

अमरनाथ यात्रा का इतिहास अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन पिछले वर्ष सुरक्षा चुनौतियों के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में गिरावट देखी गई थी। वर्ष 2024 में 5.12 लाख श्रद्धालुओं के मुकाबले 2025 में यह संख्या घटकर 3.5 लाख रह गई थी। हालांकि, इस वर्ष प्रशासन और हितधारकों के बेहतर इंतजामों के कारण संख्या में फिर से उछाल आया है।

क्या आप जानते हैं?: अमरनाथ गुफा 12,756 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जहाँ ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण स्वास्थ्य जांच अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या बिना पंजीकरण के अमरनाथ यात्रा की जा सकती है?
नहीं, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना पंजीकरण और RFID कार्ड के बेस कैंप की ओर बढ़ना वर्जित है।

2. प्रतिदिन कितने यात्रियों को अनुमति दी जाती है?
सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत, पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों के लिए प्रतिदिन 10,000 यात्रियों की सीमा निर्धारित है।