भारत में मिड-डे मील योजना ने दशकों में एक लंबा सफर तय किया है। जानिए कैसे 1920 के दशक के साधारण अनाज से लेकर आज के चिकन बिरयानी और अंडे वाले मेन्यू तक यह योजना बदली है।
मुख्य बातें
- तमिलनाडु सरकार अब स्कूलों में हफ्ते में एक बार चिकन बिरयानी देने का प्रस्ताव कर रही है।
- मिड-डे मील की जड़ें 1920 के दशक के मद्रास नगर निगम के प्रयासों में मिलती हैं।
- 1995 में इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया और अब इसे 'पीएम पोषण' के नाम से जाना जाता है।
- वर्तमान में यह दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल पोषण कार्यक्रम है, जो 12 करोड़ बच्चों तक पहुँचता है।
भारत में स्कूलों में दिए जाने वाले दोपहर के भोजन यानी मिड-डे मील का मेन्यू इन दिनों फिर से सुर्खियों में है। तमिलनाडु सरकार के हालिया प्रस्ताव ने हलचल मचा दी है, जिसमें बच्चों को सप्ताह में एक बार चिकन बिरयानी परोसने की बात कही गई है। वहीं, पश्चिम बंगाल में अंडों को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद भी इस योजना को चर्चा के केंद्र में ले आया है।
इतिहास: मद्रास से पीएम पोषण तक का सफर
मिड-डे मील का इतिहास काफी पुराना है। हालांकि बड़े पैमाने पर इसकी शुरुआत 1995 में हुई थी, लेकिन इसकी नींव आजादी से पहले ही रख दी गई थी। सबसे पहले 1920 में मद्रास नगर निगम ने बच्चों को खाना खिलाने की पहल की थी। इसके बाद 1956 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. कामराज ने 'स्कूल फीडिंग योजना' को आगे बढ़ाया। केरल ने 1984 में इसे आधिकारिक तौर पर अपनाया, जिससे वह देश का दूसरा ऐसा राज्य बना।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, मिड-डे मील केवल एक भोजन योजना नहीं है, बल्कि यह कुपोषण के खिलाफ भारत का सबसे बड़ा हथियार है। यह न केवल बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार करता है, बल्कि स्कूलों में नामांकन और उपस्थिति बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेन्यू में बदलाव अक्सर सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय बन जाता है, जैसा कि हम वर्तमान में अंडों और मांसाहारी भोजन को लेकर देख रहे हैं।
मिड-डे मील का विकास भारत की बदलती पोषण संबंधी प्राथमिकताओं और सामाजिक-राजनीतिक जटिलताओं का प्रतिबिंब है।
2021 में, केंद्र सरकार ने इस योजना का नाम बदलकर 'पीएम पोषण शक्ति निर्माण' कर दिया। आज यह योजना 10 करोड़ से अधिक बच्चों को कवर करती है, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा कार्यक्रम बनाता है।
राज्यवार मेन्यू का अंतर
भारत के विभिन्न राज्यों में मेन्यू अलग-अलग है। जहाँ केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में अंडे शामिल हैं, वहीं गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में मुख्य रूप से शाकाहारी भोजन (दाल, चावल, सब्जी) दिया जाता है।
| विशेषता | शुरुआती दौर (1920-1995) | वर्तमान दौर (पीएम पोषण) |
|---|---|---|
| मुख्य भोजन | कच्चा अनाज (चावल/गेहूं) | पका हुआ पौष्टिक भोजन |
| मेनू विस्तार | सीमित (सिर्फ अनाज) | अंडा, फल, दूध, चिकन बिरयानी (कुछ राज्यों में) |
| कवरेज | स्थानीय स्तर पर | राष्ट्रीय स्तर (12 करोड़+ बच्चे) |
Frequently Asked Questions
1. मिड-डे मील का नया नाम क्या है?
अब इसे आधिकारिक तौर पर 'पीएम पोषण' या 'पीएम पोषण शक्ति निर्माण' कहा जाता है।
2. क्या सभी राज्यों में नॉन-वेज मिलता है?
नहीं, यह राज्य सरकारों के निर्णय पर निर्भर करता है। कुछ राज्यों में अंडा मिलता है, जबकि कुछ में केवल शाकाहारी भोजन दिया जाता है।