केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि इथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending) के कारण पेट्रोल की कीमतें नियंत्रण में हैं, वरना कीमतें ₹125 प्रति लीटर तक पहुंच सकती थीं। सरकार ने खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चावल के उपयोग की अफवाहों को भी सिरे से खारिज कर दिया है।

मुख्य बिंदु

  • इथेनॉल मिश्रण के बिना दिल्ली में पेट्रोल ₹125/लीटर तक पहुंच सकता था।
  • सरकार ने खाद्य सुरक्षा से समझौता किए बिना केवल अधिशेष और खराब चावल का उपयोग किया है।
  • भारत ने 2030 के लक्ष्य को 5 साल पहले ही प्राप्त कर लिया है।
  • इथेनॉल ब्लेंडिंग से ₹1.90 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा बची है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम ने वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद घरेलू कीमतों को स्थिर रखने में मदद की है। मंत्रालय के अनुसार, यदि इथेनॉल का मिश्रण नहीं किया जाता, तो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग ₹125 प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी।

खाद्य सुरक्षा पर स्पष्टीकरण

हाल ही में उठाई गई उन आलोचनाओं को सरकार ने खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि इथेनॉल बनाने के लिए फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के चावल को कम कीमत पर बेचा जा रहा है, जिससे देश को नुकसान हो रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) की जरूरतों को पूरा करने के बाद ही केवल अधिशेष चावल, खराब हो चुके अनाज या मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त चावल का उपयोग इथेनॉल उत्पादन के लिए किया जा रहा है।

इथेनॉल मिश्रण केवल एक ईंधन विकल्प नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण ढाल है।

बोजोकमीडिया विश्लेषण (BozokMedia Analysis)

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि भारत का इथेनॉल कार्यक्रम आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों मोर्चों पर सफल रहा है। 2013-14 में मात्र 1.5% से शुरू हुआ मिश्रण स्तर 2025-26 तक 20% तक पहुंच गया है। इससे न केवल कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है, बल्कि किसानों को भी ₹1.60 लाख करोड़ से अधिक की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई है।

कच्चा माल (Feedstock)खरीद मूल्य (प्रति लीटर)
मक्का (Maize)₹71.86
गन्ने का रस/सिरप₹65.61
FCI चावल₹60.32
बी-हैवी मोलासेस₹60.73

भविष्य की योजनाएं

सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में इथेनॉल मिश्रण को 20% से आगे बढ़ाने का कोई तत्काल निर्णय नहीं लिया गया है। भविष्य में किसी भी बदलाव से पहले वैज्ञानिक अध्ययन और वाहन निर्माताओं एवं तेल कंपनियों के साथ व्यापक परामर्श किया जाएगा।

क्या आप जानते हैं?: इथेनॉल मिश्रण के कारण भारत ने अब तक 310 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल के आयात को कम किया है और कार्बन उत्सर्जन में भारी कटौती की है।

Frequently Asked Questions

1. क्या इथेनॉल मिलाने से पेट्रोल की गुणवत्ता कम होती है?
नहीं, सरकार वैज्ञानिक मानकों के अनुसार मिश्रण सुनिश्चित करती है ताकि इंजन पर बुरा असर न पड़े।

2. क्या सरकार चावल का उपयोग करके खाद्य संकट पैदा कर रही है?
नहीं, केवल अधिशेष और खराब चावल का ही उपयोग किया जा रहा है, जिससे खाद्य सुरक्षा प्रभावित नहीं होती।