कोयंबटूर के वेल्लालोर डंपयार्ड में प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के टेंडर प्रक्रिया को स्थानीय निवासियों के विरोध के बाद एक महीने के लिए टाल दिया गया है। पर्यावरण समूहों ने प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को लेकर परियोजना को वापस लेने की मांग की है।
मुख्य बातें
- वेल्लालोर डंपयार्ड में 1,200 TPD क्षमता वाले प्लांट का टेंडर एक महीने के लिए स्थगित।
- स्थानीय निवासियों और पर्यावरण समूहों के विरोध के बाद सरकार ने लिया फैसला।
- प्रदूषण, दुर्गंध और भूजल संदूषण के कारण परियोजना का विरोध हो रहा है।
- निवासियों ने विकेंद्रीकृत अपशिष्ट प्रबंधन की मांग की है।
तमिलनाडु के कोयंबटूर में स्थित वेल्लालोर डंपयार्ड में प्रस्तावित 1,200 टन प्रतिदिन (TPD) क्षमता वाले वेस्ट-टू-एनर्जी (WtE) प्लांट के लिए निविदा प्रक्रिया को एक महीने के लिए स्थगित कर दिया गया है। यह परियोजना कोयंबटूर और तिरुपुर से निकलने वाले नगरपालिका ठोस कचरे के प्रसंस्करण के लिए बनाई जा रही थी।
यह निर्णय कुरिची-वेल्लालोर प्रदूषण रोकथाम संयुक्त कार्य समिति और पूवलगिन ननर्गल द्वारा तमिलनाडु के आबकारी मंत्री के. विग्नेश को सौंपे गए ज्ञापन के बाद लिया गया है। निविदाएं, जो 31 जुलाई को खोली जानी थीं, अब टाल दी गई हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल कचरा प्रबंधन का नहीं, बल्कि शहरी विकास और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच बढ़ते संघर्ष का प्रतीक है। स्थानीय निवासियों का तर्क है कि डंपयार्ड के कारण वर्षों से वायु प्रदूषण, दुर्गंध और भूजल प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएं बनी हुई हैं।
स्थानीय समुदायों का विरोध यह दर्शाता है कि अब बड़े बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट्स में जन-भागीदारी और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन अनिवार्य हो गया है।
कार्य समिति के सचिव के.एस. मोहन ने बताया कि मंत्री ने उनकी चिंताओं को सुना है और अधिकारियों के साथ परामर्श करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। निवासियों की मांग है कि सरकार 'ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026' के अनुरूप विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन प्रणाली को अपनाए और पुराने कचरे को बायोमाइनिंग के माध्यम से वैज्ञानिक तरीके से हटाए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वेल्लालोर डंपयार्ड लंबे समय से कोयंबटूर के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। वर्षों से जमा हुआ कचरा (legacy waste) न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. प्रस्तावित प्लांट की क्षमता कितनी थी?
प्रस्तावित प्लांट की क्षमता 1,200 टन प्रतिदिन (TPD) थी।
2. निवासियों की मुख्य मांग क्या है?
निवासी वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के बजाय विकेंद्रीकृत अपशिष्ट प्रबंधन और डंपयार्ड को स्थायी रूप से बंद करने की मांग कर रहे हैं।