दिल्ली पुलिस की 20 जुलाई की संसद मार्च के दौरान की कार्रवाई को लेकर बहस में सेवानिवृत्त अफसरों ने कहा कि मीडिया ने बल प्रयोग को एकतरफ़ा दिखाया है। उन्होंने पुलिस की ग्रेडेड प्रतिक्रिया प्रक्रिया और गैर-घातक हथियारों के उपयोग को उजागर किया।
मुख्य बिंदु
- सेवानिवृत्त अफसरों ने पुलिस की छवि को अनुचित रूप से चित्रित करने की आलोचना की।
- पुलिस की ग्रेडेड प्रतिक्रिया प्रक्रिया और पेल्लेट गन जैसे गैर-घातक हथियारों का प्रयोग समझाया गया।
- जनता से पुलिस के बलिदानों को पहचानने और समर्थन करने का आह्वान किया गया।
नई दिल्ली—20 जुलाई को संसद के सामने हुए छात्र मार्च के बाद, दिल्ली पुलिस के सेवानिवृत्त गैर-गजेटेड अफसरों ने प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में एक सम्मेलन आयोजित कर पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि मीडिया ने इस मुद्दे को "एकतरफ़ा" बना दिया है और पुलिस कर्मियों को हुए चोटों को अनदेखा किया गया है।
इतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में कई छात्र आंदोलन हुए हैं, जैसे 2020 में एंटी-CAA प्रदर्शन और 2022 में विश्वविद्यालय शुल्क वृद्धि विरोध। इन घटनाओं में भी पुलिस ने जलकैनन, गैस और लाठी चार्ज जैसी ग्रेडेड प्रतिक्रिया अपनाई थी, जिससे सार्वजनिक बहस और नीति‑निर्धारण पर असर पड़ा।
सेवानिवृत्त अधिकारियों के बयानों का सार
पूर्व यूपी डीजीपी और राज्यसभा सांसद बृज लाल ने कहा, "लगभग 38 वर्षों की सेवा में मैंने कई कानून‑व्यवस्था स्थितियों को संभाला है। सब पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हैं, लेकिन 128 घायल पुलिस कर्मियों पर कोई सवाल नहीं करता।" उन्होंने बताया कि पुलिस पहले जलकैनन, फिर थ्रो गैस, और अंत में लाठी चार्ज का क्रम अपनाती है, और बैटन चार्ज के दौरान भी महत्वपूर्ण अंगों को मारने से बचा जाता है।
बृज लाल ने पेल्लेट गन को "एक गैर‑घातक विकल्प" बताया, यह कहते हुए कि "यह 12‑बोर शॉटगन है, जिसका उद्देश्य राइफल की जगह देना था, पर इसे अनावश्यक रूप से खलनायक बनाया गया है"। सुप्रीम कोर्ट ने भी इन हथियारों की वैधता को मान्य किया है।
सेवानिवृत्त एसीपी राजेन्द्र पाथानिया ने युवा पीढ़ी से अपील की, "पुलिस कर्मी नाज़ुक नहीं हैं, उन्हें सार्वजनिक समझ और सम्मान की आवश्यकता है।" उन्होंने कहा कि पुलिस को भी हिंसक भीड़ और आपराधिक तत्वों में अंतर करना पड़ता है, पर सेवा नियमों के कारण वे सार्वजनिक रूप से खुद का बचाव नहीं कर सकते।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the narrative surrounding crowd‑control tactics influences public trust in law‑enforcement agencies, which in turn affects the legitimacy of democratic protests.
"Effective communication of police protocols is essential to bridge the gap between security forces and civil society," says security analyst Dr. Ananya Mehta.
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: पेल्लेट गन क्यों इस्तेमाल किए गए?
उत्तर: यह गैर‑घातक हथियार है, जिसका उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना है जबकि गंभीर चोटों की संभावना को कम करना है।
प्रश्न 2: पुलिस की ग्रेडेड प्रतिक्रिया प्रक्रिया क्या है?
उत्तर: पहले जलकैनन, फिर थ्रो गैस, उसके बाद लाठी चार्ज और अंत में बैटन या पेल्लेट गन जैसी गैर‑घातक हथियारों का प्रयोग किया जाता है।