राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है जिसने एक उन्नत डिजिटल मेडिकल इमरजेंसी रेफरल सिस्टम लागू किया है। इस तकनीक के माध्यम से मरीज के अस्पताल पहुँचने से पहले ही उसका मेडिकल डेटा डॉक्टरों तक पहुँच जाएगा।
मुख्य बातें
- राजस्थान देश का पहला राज्य बना जिसने SETU मॉडल लागू किया।
- मरीज के अस्पताल पहुँचने से पहले ही उसका मेडिकल इतिहास कंट्रोल रूम को मिल जाएगा।
- SETU सिस्टम स्मार्टफोन और QR कोड के जरिए काम करता है, जिससे भारी निवेश की जरूरत नहीं है।
- यह प्रणाली ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों को शहरी मेडिकल कॉलेजों से जोड़ती है।
राजस्थान ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए एक नया डिजिटल मेडिकल इमरजेंसी रेफरल सिस्टम शुरू किया है। इस नवाचार का मुख्य उद्देश्य मरीजों के लिए 'गोल्डन आवर' (इलाज के शुरुआती महत्वपूर्ण घंटे) का अधिकतम लाभ उठाना है। अब मरीज के अस्पताल पहुँचने से पहले ही, अस्पताल के विशेषज्ञ उसकी स्थिति से पूरी तरह अवगत होंगे।
SETU: ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य सेवाओं के बीच एक डिजिटल सेतु
उदयपुर के रबींद्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज में विकसित और परीक्षण किया गया Simplified Emergency Transfer and Urgent Referral (SETU) मॉडल पहले ही राज्य के 15 जिलों में 3,510 से अधिक आपातकालीन मामलों को सफलतापूर्वक संभाल चुका है। प्रधान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सचिव गायत्री राठौर ने बताया कि यह प्रणाली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को शहरों के मेडिकल कॉलेजों और तृतीयक अस्पतालों से जोड़ने वाला एक मजबूत डिजिटल पुल है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस प्रणाली की सबसे बड़ी ताकत इसकी सादगी है। यह सिस्टम स्मार्टफोन, क्यूआर (QR) कोड और क्लोज्ड यूजर ग्रुप (CUG) नेटवर्क का उपयोग करता है, जिससे बुनियादी ढांचे पर भारी खर्च किए बिना अत्याधुनिक सेवा प्रदान की जा सकती है। जैसे ही कोई डॉक्टर डिजिटल ऐप के माध्यम से मरीज को रेफर करता है, अस्पताल को मरीज का डिजिटल डेटा, पहुंचने का अनुमानित समय और लाइव GPS ट्रैकिंग प्राप्त हो जाती है।
यह तकनीक 'ब्लाइंड अराइवल' (बिना जानकारी के मरीज का पहुंचना) की समस्या को खत्म कर जीवन बचाने की दर में भारी वृद्धि करेगी।
अस्पताल के कंट्रोल रूम को तुरंत ट्रॉमा, सर्जरी, प्रसूति और बाल रोग जैसे संबंधित विभागों के सुपर-स्पेशलिस्ट को अलर्ट कर दिया जाता है और आईसीयू या आपातकालीन बेड आरक्षित कर दिए जाते हैं। इससे डॉक्टरों की टीम एम्बुलेंस के दरवाजे खुलते ही 'मिनट जीरो' से इलाज शुरू करने के लिए तैयार रहती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. SETU प्रणाली कैसे काम करती है?
यह स्मार्टफोन और QR कोड का उपयोग करती है, जिससे मरीज का डेटा और लाइव लोकेशन तुरंत अस्पताल के कंट्रोल रूम को मिल जाती है।
2. इस प्रणाली का मुख्य लाभ क्या है?
इसका मुख्य लाभ यह है कि अस्पताल पहुँचने से पहले ही विशेषज्ञ डॉक्टर और बेड तैयार रहते हैं, जिससे इलाज में देरी नहीं होती।