सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति उज्जल भुइया ने कॉलेजियम द्वारा नियुक्तियों के लिए कारण न बताने की प्रथा पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि यह अच्छा काम करने वाले न्यायाधीशों के साथ अन्याय है और नागरिकों को जानने का अधिकार है।
मुख्य बिंदु
- न्यायमूर्ति उज्जल भुइया ने कॉलेजियम की 'अपारदर्शी' प्रक्रिया की आलोचना की।
- उन्होंने कहा कि बिना कारण बताए नाम वापस लेना योग्य न्यायाधीशों के लिए अन्यायपूर्ण है।
- न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता की कमी खराब नियुक्तियों का कारण बन सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्जल भुइया ने न्यायिक नियुक्तियों में शामिल सर्वोच्च न्यायालय की कॉलेजियम प्रणाली की कार्यप्रणाली पर गहरी चिंता व्यक्त की है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि जब कॉलेजियम किसी नाम की सिफारिश करता है या उसे वापस लेता है, तो उसके पीछे के कारणों को सार्वजनिक न करना उन न्यायाधीशों के साथ बड़ा अन्याय है जो ईमानदारी से अपना काम कर रहे हैं।
पारदर्शिता की मांग और नागरिक अधिकार
न्यायमूर्ति भुइया ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को यह जानने का पूर्ण अधिकार है कि किसी न्यायाधीश को बड़ी अदालत में क्यों भेजा जा रहा है या उनकी सिफारिश क्यों रोकी जा रही है। उन्होंने 'चींटी' (ant) का एक रूपक प्रयोग करते हुए बताया कि कैसे छोटी-छोटी बातों पर भी ध्यान देने की जरूरत है और पारदर्शिता के अभाव में अफवाहें फैलती हैं, जो संस्था की छवि को धूमिल करती हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में न्यायिक नियुक्तियों के लिए कॉलेजियम प्रणाली 'तीन न्यायाधीशों के मामले' (1993) के बाद से लागू हो रही है, जिसने राष्ट्रपति की शक्तियों को कम कर न्यायपालिका को नियुक्तियों में मुख्य आधार बना दिया। हालांकि, इस प्रणाली पर लगातार यह आरोप लगता रहा है कि यह बहुत ही 'गोपनीय' और अपारदर्शी है। 2015 में, सरकार द्वारा लाया गया राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) विधेयक भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक करार दिए जाने के बाद खत्म हो गया था, जिससे कॉलेजियम की वापसी हुई थी।
यह मायने क्यों रखता है
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता का सवाल सिर्फ कानूनी व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम जनता के न्यायपालिका पर भरोसे को भी प्रभावित करता है। जब तक नियुक्ति की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होगी, योग्यता के आधार पर नियुक्तियों की संभावनाओं पर संदेह बना रहेगा।
"जब कारण सार्वजनिक नहीं होते, तो यह मान लिया जाता है कि या तो कोई राजनीतिक दबाव है या फिर व्यक्तिगत पूर्वाग्रह। पारदर्शिता ही इसका इलाज है।"
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम क्या है?
उत्तर: यह देश की उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति और उनके स्थानांतरण के लिए जिम्मेदार पांच सबसे वरिष्ठ न्यायाधीशों का एक निकाय है।
प्रश्न: न्यायमूर्ति भुइया ने कॉलेजियम की किस प्रथा की आलोचना की?
उत्तर: उन्होंने कॉलेजियम द्वारा न्यायाधीशों की सिफारिश या अस्वीकृति के पीछे के कारणों को छिपाने और पारदर्शिता की कमी की आलोचना की।