मेट्टूर बांध में पानी की कमी के कारण शनिवार को नहर सिंचाई के लिए पानी छोड़ने का निर्धारित कार्यक्रम टाल दिया गया है। इससे सलेम, नामक्कल और इरोड के किसानों की सिंचाई योजनाओं पर असर पड़ा है।

मुख्य बातें

  • मेट्टूर बांध से नहर सिंचाई के लिए पानी का वितरण स्थगित कर दिया गया है।
  • पानी की कम उपलब्धता के कारण डेल्टा सिंचाई को प्राथमिकता दी जा रही है।
  • सलेम, नामक्कल और इरोड के 45,000 एकड़ क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं।
  • कर्नाटक में बारिश शुरू होने से बांध में जलस्तर बढ़ने की उम्मीद है।

मेट्टूर, तमिलनाडु: मेट्टूर बांध (स्टेनली जलाशय) से शनिवार, 1 अगस्त को पूर्व और पश्चिम तट नहरों के लिए पानी छोड़ने का निर्धारित कार्यक्रम पूरा नहीं हो सका। बांध में पानी की उपलब्धता कम होने के कारण अधिकारियों ने इस वर्ष नहर सिंचाई के लिए पानी छोड़ने में देरी की है।

पानी की कमी और सिंचाई का संकट

आमतौर पर, मेट्टूर बांध से नहर सिंचाई के लिए पानी का डिस्चार्ज 1 अगस्त से शुरू होकर 15 दिसंबर तक चलता है। इस प्रक्रिया से सलेम, नामक्कल और इरोड जिलों के लगभग 45,000 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई होती है। हालांकि, इस वर्ष पानी की भारी कमी के कारण जून में डेल्टा सिंचाई के लिए भी पानी नहीं छोड़ा जा सका था।

क्यों महत्वपूर्ण है यह स्थिति?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, मेट्टूर बांध से पानी का वितरण न होना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह कृषि चक्र और क्षेत्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए एक गंभीर संकेत है। पानी की उपलब्धता सीधे तौर पर किसानों की आय और फसल की पैदावार को प्रभावित करती है।

पानी की कमी के कारण नहर सिंचाई का टलना कृषि क्षेत्र के लिए एक चुनौतीपूर्ण संकेत है, जो मानसून पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है।

जल संसाधन विभाग (WRD) के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में 'डेल्टा सिंचाई' को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। जब डेल्टा क्षेत्रों की आवश्यकताएं पूरी हो जाएंगी, तभी नहर सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाएगा।

वर्तमान जल स्तर की स्थिति

शनिवार तक मेट्टूर बांध का जलस्तर 120 फीट की पूर्ण क्षमता के मुकाबले केवल 73.49 फीट दर्ज किया गया। बांध का कुल भंडारण 93.47 tmc ft की क्षमता के मुकाबले मात्र 35.77 tmc ft है। हालांकि, पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कावेरी नदी में डिस्चार्ज को 1,000 क्युसेक से बढ़ाकर 1,500 क्युसेक कर दिया गया है।

क्या आप जानते हैं?: मेट्टूर बांध से नहर सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की परंपरा पिछले 71 वर्षों से चली आ रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. नहर सिंचाई के लिए पानी कब छोड़ा जाएगा?
पानी का डिस्चार्ज डेल्टा सिंचाई पूरी होने और बांध में पर्याप्त आवक (Inflow) होने के बाद ही शुरू किया जाएगा।

2. किन जिलों को इससे सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा?
सलेम, नामक्कल और इरोड जिलों के किसान इससे सबसे अधिक प्रभावित होंगे।