डेमोक्रेटिक‑नेतृत्व वाले 25 राज्य ट्रम्प प्रशासन के 60 व्यापार साझेदारों पर लगाए 10%‑12.5% टैरिफ़ों को असंवैधानिक मानते हुए मुक़दमा दायर कर रहे हैं। वे अदालत से टैरिफ़ों को रोकने और भुगतान किए गए कस्टम्स की वापसी की मांग कर रहे हैं।
मुख्य बिंदु
- 25 डेमोक्रेटिक‑नेतृत्व वाले राज्य ट्रम्प प्रशासन के टैरिफ़ों को चुनौती देते हैं।
- टैरिफ़ 60 व्यापारिक साझेदारों पर 10% या 12.5% लागू होते हैं, जो अमेरिकी आयात का 99.4% हैं।
- राज्य अदालत से टैरिफ़ों को रद्द, गैरकानूनी घोषित और रिफंड की माँग कर रहे हैं।
डेमोक्रेटिक‑नेतृत्व वाले 25 राज्यों ने संयुक्त राज्य अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अदालत में एक संयुक्त मुक़दमा दायर किया, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 60 अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर लगाए गए व्यापक टैरिफ़ों को संवैधानिक अधिकार से बाहर करार दिया।
राज्य यह दावा करते हैं कि प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 का उपयोग करके पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए गए टैरिफ़ों को फिर से लागू किया, जिससे परिवारों और व्यवसायों पर अतिरिक्त कर का बोझ बढ़ा। इस दावे में न्यूयॉर्क अटॉर्नी जनरल लूटिया जेम्स ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट में हार के बाद प्रशासन फिर से अवैध रूप से टैक्स लगा रहा है।”
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ट्रम्प प्रशासन ने 2018 में चीन और अन्य देशों पर टैरिफ़ लागू किए थे, जिन्हें बाद में अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) के तहत चुनौती मिली। 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि IEEPA ट्रम्प के टैरिफ़ों को समर्थन नहीं देता, जिससे प्रशासन ने धारा 301 के तहत नई वैधता खोजी।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यदि ये टैरिफ़ बरकरार रहे तो अमेरिकी उपभोक्ताओं को दैनिक वस्तुओं जैसे किराना, निर्माण सामग्री और गैजेट्स पर अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ेगा, जिससे आर्थिक असमानता बढ़ेगी।
“सार्वत्रिक टैरिफ़ों का प्रयोग अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के विपरीत है और यह अमेरिकी कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता को नुकसान पहुँचाता है।” – अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञ डॉ. अनीता शर्मा
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या टैरिफ़ रद्द होने पर राज्य को रिफंड मिलेगा?
उत्तर: यदि अदालत टैरिफ़ को असंवैधानिक घोषित करती है, तो राज्य को अब तक भुगतान किए गए कस्टम्स की वापसी का अधिकार मिल सकता है।
प्रश्न 2: धारा 301 के तहत टैरिफ़ लगाने की प्रक्रिया क्या है?
उत्तर: धारा 301 में किसी विशेष देश के अनुचित व्यापार व्यवहार की जाँच के बाद ही टैरिफ़ लगाया जा सकता है, और वह टैरिफ़ उस विशिष्ट समस्या को ठीक करने के उद्देश्य से होना चाहिए।