महाराष्ट्र रियल एस्टेट नियामक (महाRERA) ने निर्मिती वास्तु क्रिएशन LLP के एकतरफ़ा रद्दीकरण क्लॉज़ को गैरकानूनी पाया और डेवलपर को देर से कब्जे के लिए ब्याज चुकाने का आदेश दिया। यह निर्णय खरीदारों के अधिकारों को सुदृढ़ करता है।
मुख्य बिंदु
- एकतरफ़ा रद्दीकरण क्लॉज़ को गैरकानूनी घोषित किया गया
- डिलेड पॉज़ेशन पर 1 अक्टूबर 2023 से ब्याज का भुगतान अनिवार्य
- डेवलपर को सहकारी आवासी सोसायटी बनानी होगी
महाRERA ने निर्मिती वास्तु क्रिएशन LLP के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया, जिसमें क्लॉज़ 7(G) को RERA के तहत उपलब्ध सुरक्षा उपायों के विरुद्ध माना गया। यह क्लॉज़ बिल्डर को खरीदार की शक्ति‑प्रतिनिधि (Power of Attorney) के माध्यम से एकतरफ़ा रद्दीकरण करने की अनुमति देता था।
Historical Background
2016 में लागू हुए रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट (RERA) ने भारतीय रियल एस्टेट बाजार में पारदर्शिता और खरीदार सुरक्षा को प्राथमिकता दी। महाराष्ट्र में महाRERA ने इस अधिनियम को लागू कर कई विवादों को सुलझाया है, जिनमें इस तरह के अनुचित अनुबंधीय शर्तें शामिल हैं।
हेमंत अशोक गाडे ने अगस्त 2021 में 42.65 लाख रुपये देकर निर्मिती 25 ईस्ट प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक किया था। अनुबंध के अनुसार 30 सितंबर 2023 तक कब्जा देना था, परन्तु यह नहीं हुआ।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि इस निर्णय से रियल एस्टेट बाजार में डेवलपरों को अनुचित शर्तें लागू करने से रोका जाएगा और खरीदारों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी। यह प्री‑सेल कॉन्ट्रैक्ट्स में पारदर्शिता को बढ़ावा देता है, जिससे निवेशकों का विश्वास पुनः स्थापित होगा।
Legal experts warn that unilateral cancellation clauses undermine buyer protection under RERA.
महाRERA ने आदेश दिया कि डेवलपर 1 अक्टूबर 2023 से लेकर वैध कब्जा और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी होने तक ब्याज का भुगतान करेगा। साथ ही, उन्होंने डेवलपर को सेक्शन 11(4)(e) के तहत सहकारी आवासी सोसायटी बनाने और 20,000 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का निर्देश दिया।
Frequently Asked Questions
Q1: यह RERA आदेश घर खरीदारों के लिए क्या मायने रखता है?
A: यह खरीदारों को अनुचित रद्दीकरण शर्तों से सुरक्षा देता है और देर से डिलिवरी पर आर्थिक मुआवजा सुनिश्चित करता है।
Q2: क्या डेवलपर इस निर्णय के खिलाफ अपील कर सकता है?
A: हाँ, डेवलपर को दो महीने का समय दिया गया है और वह उच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है।